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जब ऑपरेशन सिंदूर से दहला था पाकिस्तान: अब हार के दिन भी मना रहा जीत का जश्न, शहबाज ने रचा मारका-ए-हक का पाखंड

Mon, 11 May 2026 02:25 AM IST
राकेश कुमार पीटीआई, इस्लामाबाद

सार

भारत के ऑपरेशन सिंदूर से मिली करारी हार को छिपाने के लिए अब आतंकिस्तान 10 मई को विजय दिवस मना रहा है, जबकि असल में इसी दिन वह भारत के शौर्य के आगे घुटने टेकने पर मजबूर हुआ था। हार की बरसी पर 'मारका-ए-हक' का पाखंड रचकर शहबाज शरीफ ने साबित कर दिया है कि पाकिस्तान अब अपनी फजीहत को भी जीत बताने की कला में माहिर हो गया है।
 
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शहबाज शरीफ, पाकिस्तानी पीएम - फोटो : X @CMShehbaz
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विस्तार
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पिछले साल भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के खौफ से सहमे पाकिस्तान ने अब अपनी खीझ मिटाने के लिए 10 मई को 'मारका-ए-हक' दिवस के रूप में मनाने का पाखंड रचा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को इस्लामाबाद में इसकी घोषणा की। यह वही दिन है जब भारतीय सेना के प्रचंड प्रहार के बाद पाकिस्तान को युद्ध विराम की गुहार लगानी पड़ी थी।
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ऑपरेशन सिंदूर: जब भारत ने घर में घुसकर मारा
इस पूरे विवाद की जड़ सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद था। पिछले साल पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में 26 निर्दोष भारतीय पर्यटकों की जान गई थी। इसका मुंहतोड़ जवाब देते हुए भारत ने सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। भारतीय जांबाजों ने सीमा पार नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों को जमींदोज कर दिया। इस सर्जिकल स्ट्राइक में 100 से अधिक खूंखार आतंकवादी मारे गए थे, जिससे पाकिस्तान का रक्षा तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो गया था।

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भारत की कूटनीति के सामने दुनिया ने मानी हार
संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की नाकाम कोशिश की, जिसे भारतीय सेना ने सीमा पर ही कुचल दिया। हालात इतने बेकाबू हो गए कि शहबाज शरीफ को अमेरिका, सऊदी अरब और चीन जैसे देशों से मदद की भीख मांगनी पड़ी। अंततः 10 मई 2025 को पाकिस्तान ने हॉटलाइन पर घुटने टेके और सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की। भारत ने वैश्विक मंच पर स्पष्ट कर दिया है कि यह समझौता किसी विदेशी दबाव में नहीं, बल्कि पाकिस्तान की सीधी सैन्य हार का नतीजा था।
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धूल फांकता पाकिस्तान और खोखले दावे
समारोह के दौरान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अपनी सेना की तारीफों के पुल बांधे, लेकिन हकीकत यह थी कि खराब मौसम का बहाना बनाकर पाक वायुसेना ने अपना प्रस्तावित फ्लाई पास्ट तक रद्द कर दिया। भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि 'मारका-ए-हक' जैसे नाम केवल अपनी जनता को गुमराह करने के लिए दिए जा रहे हैं, जबकि हकीकत में यह भारत की सैन्य शक्ति के सामने पाकिस्तान के आत्मसमर्पण की वर्षगांठ है।

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