कनाडा में भारत के शीर्ष राजनयिक दिनेश पटनायक ने ओटावा में हुए खालिस्तान जनमत-संग्रह को 'नाटक जैसा कार्यक्रम' बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध ठीक है, लेकिन ऐसे कदम भारत में कनाडा की दखलअंदाजी की तरह देखे जाते हैं।
कनाडा में हुए खालिस्तान जनमत-संग्रह को लेकर भारत ने सख्त रवैया अपनाया है। कनाडा में भारत के शीर्ष राजनयिक दिनेश पटनायक ने ओटावा में हुए इस जनमत संग्रह पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध ठीक है, लेकिन कनाडा को यह समझना चाहिए कि उसके ऐसे कदम का भारत पर कैसा असर पड़ेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में ऐसे कदमों को कनाडा की दखलअंदाजी की तरह देखा जाता है। एक न्यूज चैलन से बातचीत के दौरान पटनायक ने रविवार को हुए इस जनमत-संग्रह को 'नाटक जैसा कार्यक्रम' बताया। उन्होंने कहा कि भारत को लोगों के राजनीतिक मांग उठाने पर कोई आपत्ति नहीं है।
पटनायक ने उदाहरण देते हुए बताया कि भारत में खुद कुछ राजनीतिक दल खालिस्तान की मांग उठाते हैं और उनके सांसद संसद में बैठे हैं, जिनमें से एक पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या में दोषी ठहराए गए व्यक्ति का बेटा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कनाडा असली जनमत-संग्रह की प्रक्रिया जानता है, इसलिए उसे पता है कि यह कार्यक्रम वास्तविक नहीं है।
पटनायक ने कनाडा को समझाने के लिए उदाहरण देते हुए कहा सोचिए अगर कोई दूसरा देश क्यूबेक के मुद्दे पर ऐसा कार्यक्रम करे, तो आपको कैसा लगेगा? उन्होंने साफ किया कि उनका मकसद किसी को नाराज करना नहीं है, बल्कि इस मुद्दे की संवेदनशीलता समझाना है।