नेपाली एपीएफ के दावों के उलट भारतीय सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के महानिदेशक कुमार राजेश चंद्रा ने यह तो माना कि शुक्रवार सुबह करीब 8.40 बजे हुई घटना नेपाली सीमा के बेहद अंदर हुई है। लेकिन उन्होंने स्थानीय लोगों से मिली प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर कहा कि भारतीय नागरिक मौके पर महज प्रदर्शन कर रहे थे। वे लोग एपीएफ के जवानों द्वारा क्षेत्र में 14 जून तक लॉकडाउन होने के चलते भारतीयों की मौजूदगी पर आपत्ति जताने का विरोध कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सीमा पर किसी तारबंदी के नहीं होने से दोनाें तरफ मौजूद गांवों की आपस में रिश्तेदारियां हैं और लोग बेरोकटोक अपने परिजनों से मिलने के लिए आवाजाही करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि एपीएफ के आपत्ति जताने पर भारतीय ग्रामीणों की उनसे तीखी नोकझोंक हुई, इसके बाद ही भारतीय नागरिकों की तरफ से पथराव किया गया था। बता दें कि एसएसबी के जवान ही भारत-नेपाल के बीच 1751 किलोमीटर लंबी सीमा की देखरेख करते हैं।
हिरासत से लौटे लगन ने कहा, बटों से पीटा गया मुझे
एपीएफ की हिरासत से रिहाई के बाद बिहार के सीतामढ़ी लौटे व्यापारी लगन किशोर ने आरोप लगाया है कि एपीएफ के जवान व्यापारियों पर फायरिंग करने के बाद उसे भारतीय सीमा के अंदर से दबोचकर अकारण अपनी सीमा में ले गए थे और वहां राइफलों की बट से बुरी तरह उसकी पिटाई करने के बाद संग्रामपुर ले जाकर बंद कर दिया।
लगन ने आरोप लगाया कि एपीएफ के जवान उससे जबरन यह कबूलवाना चाहते थे कि मुझे नेपाल के अंदर से हिरासत में लिया गया है। लगन ने कहा कि मैं,मेरा बेटा और मेरी बहू (नेपाली नागरिक) से मिलने गए थे। वहां एपीएफ के जवानों ने हम पर हमला कर दिया।