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Artemis Accords: नासा अधिकारी बोलीं- भारत अब वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति, 'आर्टेमिस समझौते' में शामिल होने की जरूरत

Sat, 17 Jun 2023 04:20 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

Artemis Accords: नासा कार्यालय में प्रौद्योगिकी, नीति और रणनीति के लिए सहायक प्रशासक भव्या लाल ने शुक्रवार को बताया कि मई 2023 तक आर्टेमिस समझौते पर 25 हस्ताक्षरकर्ता हैं और उम्मीद है कि भारत 26वां देश बनेगा। 
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आर्टेमिस अकॉर्ड्स - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत वैश्विक शक्ति और अंतरिक्ष तक स्वतंत्र पहुंच वाले देशों में से एक है और उसे आर्टेमिस समझौते का हिस्सा बनने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यहअंतरिक्ष खोज में समान विचारधारा वाले देशों को एक साथ लाता है। 

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क्या है आर्टेमिस समझौता?
1967 की बाहरी अंतरिक्ष संधि (ओएसटी) में आधारित 'आर्टेमिस समझौता' 21वीं सदी में नागरिक अंतरिक्ष खोज का मार्गदर्शन करने के लिए डिजाइन किए गए सिद्धांतों का एक गैर-बाध्यकारी सेट है। यह 2025 तक मानव को चंद्रमा पर उतारने का अमेरिकी नेतृत्व वाला प्रयास है, जिसका अंतिम लक्ष्य मंगल ग्रह और उससे परे अंतरिक्ष अन्वेषण का विस्तार करना है।

'समझौते पर हस्ताक्षर भारत के लिए प्राथमिकता हो'
नासा कार्यालय में प्रौद्योगिकी, नीति और रणनीति के लिए सहायक प्रशासक भव्या लाल ने शुक्रवार को पीटीआई को बताया कि मई 2023 तक आर्टेमिस समझौते पर 25 हस्ताक्षरकर्ता हैं और उम्मीद है कि भारत 26वां देश बनेगा। उन्होंने आगे कहा, मुझे लगता है कि आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर करना (भारत के लिए) प्राथमिकता होनी चाहिए। मेरा मतलब है..नासा बहुत दृढ़ता से महसूस करता है कि भारत एक वैश्विक शक्ति है। उन्होंने कहा कि यह उन कुछ देशों में से एक है जिनकी अंतरिक्ष तक स्वतंत्र पहुंच है, एक संपन्न प्रक्षेपण उद्योग है, चंद्रमा पर गया है, मंगल ग्रह पर गया है, इसे आर्टेमिस टीम का हिस्सा होने की आवश्यकता है।

'भारत वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति, सतत खोज को देता है महत्व'
भव्या आगे कहती हैं, यह इसको लेकर है कि हम यह कैसे सुनिश्चित करते हैं कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए अंतरिक्ष टिकाऊ रहे। इसलिए, मुझे लगता है कि लाभ यह है कि समान विचारधारा वाले देश जिनके समान मूल्य हैं, उन्हें एक साथ तलाशने का मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि इसका फायदा यह है कि भारत घोषणा करता है कि वह एक वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति है और सतत खोज, अंतरिक्ष के जिम्मेदार उपयोग, सहयोग, पारदर्शिता जैसी चीजों को महत्व देता है। 
 
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वह कहती हैं, यह इसको लेकर है कि हम यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि अंतरिक्ष भावी पीढ़ियों के लिए भी टिकाऊ रहे। इसलिए मुझे लगता है कि इसका फायदा यह है कि जो समान विचारधारा वाले देश हैं और जिनके समान मूल्य हैं, यह उनको एक साथ लाने का मौका देता है। उन्होंने कहा कि भारत एक वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति है और सतत खोज, अंतरिक्ष के जिम्मेदार उपयोग, सहयोग, पारदर्शिता जैसी चीजों को महत्व देता है। मथुरा में जन्मी और नई दिल्ली में पली-बढ़ी भव्या लाल ने पहले नासा के कार्यवाहक मुख्य प्रौद्योगिकीविद् के रूप में कार्य किया था और नासा के 60 से अधिक वर्षों के इतिहास में इस पद को संभालने वाली पहली महिला थीं।
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