भारत अब समुद्र में परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल की वैश्विक पहल का हिस्सा बन गया है। छोटे रिएक्टरों से जहाज चलाने से लेकर तैरते बिजली संयंत्रों तक, यह पहल भारत के सामने ऊर्जा और समुद्री क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकती है।
अमेरिका में भारत ने समुद्र में परमाणु ऊर्जा के उपयोग से जुड़ी एक वैश्विक पहल में भागीदारी की है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने बुधवार को मानचित्रावली पहल शुरू की। इसका उद्देश्य नागरिक जहाजों को चलाने और समुद्र में तैरते बिजली संयंत्रों के लिए परमाणु तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशना है। सम्मेलन में परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अजित कुमार मोहंती शामिल हुए।
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छोटे रिएक्टरों के इस्तेमाल पर जोर
इस पहल के तहत छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टरों के उपयोग पर विचार होगा। इनके जरिए वाणिज्यिक जहाजों को चलाने की संभावना तलाशी जाएगी। इससे तेज समुद्री परिवहन का रास्ता खुल सकता है। जहाजों को बार-बार ईंधन भरवाने की जरूरत भी कम हो सकती है।
क्या है अहम जानकारी?
ATLAS पहल परमाणु और समुद्री क्षेत्रों को एक मंच पर लाएगी।
इसका उद्देश्य समुद्र में परमाणु तकनीक का सुरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग बढ़ाना है।
तैरते परमाणु बिजली संयंत्रों से तटीय और दूरदराज के इलाकों को बिजली मिल सकती है।
भारत की लंबी तटरेखा और बड़ी संख्या में समुद्री द्वीप नए अवसर प्रदान करते हैं।
भारत इस पहल में अपनी स्वदेशी तकनीक और अनुभव साझा करने को तैयार है।
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भारत की ऊर्जा योजना से मेल
मोहंती ने कहा कि एटलस पहल सुरक्षित, संरक्षित और टिकाऊ तरीके से परमाणु तकनीक के उपयोग को आगे बढ़ाने के लिए सही समय पर शुरू हुई है। भारत का बड़ा वाणिज्यिक नौवहन क्षेत्र भी छोटे रिएक्टरों के इस्तेमाल के अवसर पैदा करता है। यह पहल भारत के भरोसेमंद और कम कार्बन वाली ऊर्जा के दीर्घकालिक लक्ष्य से भी मेल खाती है।
2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य
मोहंती ने कहा कि भारत ने परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु बिजली क्षमता का लक्ष्य रखा है। 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी डिजाइन वाले भारत छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर तैनात करने की भी योजना है। उन्होंने कहा कि भारत का परमाणु क्षेत्र बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
नए कानून से निजी भागीदारी
मोहंती के अनुसार, भारत ने हाल में शांति अधिनियम लागू किया है। इससे पहली बार परमाणु बिजली उत्पादन में निजी भागीदारी का रास्ता खुला है। उन्होंने कहा कि नया कानून घरेलू दायित्व व्यवस्था को वैश्विक दायित्व व्यवस्था के अनुरूप बनाता है। इससे परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड की स्थिति और शक्तियां भी मजबूत हुई हैं।