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आज आठवीं बार यूएनएससी का अस्थायी सदस्य बनेगा भारत, पाकिस्तान ने जताई चिंता

Wed, 17 Jun 2020 12:10 PM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
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यूएनएससी का आठवीं बार सदस्य बनेगा भारत (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
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भारत आसानी से बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) का 8वीं बार अस्थाई सदस्य बनने के लिए तैयार है। गैर-स्थायी सदस्य के रूप में देश का यह कार्यकाल 2021-22 के लिए होगा। 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा अपने 75वें सत्र के लिए अध्यक्ष, सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्यों और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के सदस्यों के लिए चुनाव कराएगी।

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वहीं पाकिस्तान ने इसपर गंभीर चिंता जाहिर की है। उसका कहना है कि यह खुशी नहीं बल्कि चिंता की बात है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मोहम्मद कुरैशी ने कहा कि यूएनएससी का अस्थाई सदस्य बनने का भारत का इरादा पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा इस मंच से उठाए जाने वाले प्रस्तावों को खारिज करता रहा है, खासतौर से कश्मीर के मुद्दों को।


कोविड-19 से संबंधित पाबंदियों के कारण संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में मतदान के विशेष इंतजाम किए गए हैं। भारत का अस्थायी सदस्य के तौर पर 15 देशों की सुरक्षा परिषद में शामिल होना लगभग तय है। भारत 2021-22 कार्यकाल के लिए एशिया-प्रशांत श्रेणी से अस्थायी सीट के लिए उम्मीदवार है।
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यह भी पढ़ें-यूएन में कश्मीर का मुद्दा उठाना पाक को पड़ा भारी, भारत ने दिखाया आईना

भारत की जीत इसलिए तय मानी जा रही है, क्योंकि वह समूह की इस इकलौती सीट के लिए एकमात्र उम्मीदवार है। चीन और पाकिस्तान समेत 55 सदस्यीय एशिया-प्रशांत समूह ने पिछले साल जून में सर्वसम्मति से भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया था। महासभा हर साल दो वर्ष के कार्यकाल के लिए कुल 10 में से पांच अस्थायी सदस्यों का चुनाव करती है।

ये 10 अस्थायी सीटें क्षेत्रीय आधार पर वितरित की जाती हैं। पांच सीटें अफ्रीका और एशियाई देशों के लिए, एक पूर्वी यूरोपीय देशों, दो लैटिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों तथा दो पश्चिमी यूरोपीय तथा अन्य राज्यों के लिए वितरित की जाती हैं।

परिषद में चुने जाने के लिए उम्मीदवार देशों को सदस्य देशों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि इस परिषद में भारत की मौजूदगी से ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के उसके लोकाचार को दुनिया तक लाने में मदद मिलेगी।
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उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबिंत करने और विश्वसनीय बने रहने के लिए बदलने की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र इस साल अपनी 75वीं वर्षगांठ मना रहा है।

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