चीन के किंगदाओ में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर बात की। उन्होंने अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। रक्षा मंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान में हमारी तत्काल प्राथमिकताओं में अफगान लोगों को मानवीय सहायता प्रदान करना और अफगानिस्तान की समग्र विकासात्मक आवश्यकताओं में योगदान देना शामिल है। अफ़गानिस्तान के सबसे बड़े क्षेत्रीय विकास भागीदार के रूप में भारत अफगान लोगों के लिए क्षमता निर्माण पहलों को लागू करना जारी रखता है।
रक्षा मंत्री ने सहयोग के जरिये वैश्विक चुनौतियों से निपटने में आम सहमति बनाने के भारत के प्रयासों के बारे में बताया। आतंकवाद, साइबर हमलों और हाइब्रिड युद्ध सहित अंतरराष्ट्रीय खतरों के लिए एकीकृत प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य के आदर्श वाक्य के आधार पर वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आम सहमति बनाने की कोशिश की है, जो वसुधैव कुटुंबकम के हमारे सभ्यतागत लोकाचार पर आधारित है। आपसी समझ और आपसी लाभ हमारे मार्गदर्शक सिद्धांत होने चाहिए।
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क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर दिया जोर
रक्षा मंत्री ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत एससीओ सदस्यों के बीच अधिक सहयोग और आपसी विश्वास का समर्थन करता है। हमें सामूहिक रूप से अपने लोगों की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ आज की चुनौतियों से निपटने की आकांक्षा रखनी चाहिए। हम सभी को अपने पड़ोस में स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने के अपने प्रयास में एक साथ मिलकर काम करना चाहिए।
मध्य एशिया के साथ बढ़ा रहे कनेक्टिविटी: रक्षा मंत्री
उन्होंने कहा कि भारत मध्य एशिया के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल आपसी व्यापार बढ़ता है बल्कि आपसी विश्वास भी बढ़ता है। इन प्रयासों में एससीओ चार्टर के मूल सिद्धांतों को बनाए रखना आवश्यक है। विशेष रूप से सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना।
कोई देश अकेले काम नहीं कर सकता: राजनाथ
राजनाथ सिंह ने कहा कि कोई भी देश, चाहे वह कितना भी बड़ा और शक्तिशाली क्यों न हो, अकेले काम नहीं कर सकता। वैश्विक व्यवस्था या बहुपक्षवाद का मूल विचार यही है कि राष्ट्रों को अपने पारस्परिक और सामूहिक लाभ के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए। यह हमारी सदियों पुरानी संस्कृत कहावत सर्वे जन सुखिनो भवन्तु को भी दर्शाता है, जिसका अर्थ है सभी के लिए शांति और समृद्धि।
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बैठक 2025 की चीनी अध्यक्षता के तहत आयोजित की गई
दरअसल, 25-26 जून को होने वाली दो दिवसीय एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक चीन की ओर से पूर्वी शहर किंगदाओ में आयोजित की जा रही है। इस कार्यक्रम में एससीओ के 10 पूर्ण सदस्य देशों भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और नए सदस्य बेलारूस के रक्षा मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी एक साथ आए। बैठक 2025 की चीनी अध्यक्षता के तहत आयोजित की गई है, जिसका विषय 'शंघाई भावना को बनाए रखना: एससीओ को आगे बढ़ाना' है।