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संकट में काम आई भारत की रूस से दोस्ती: कच्चा तेल ही नहीं एलएनजी आयात पर भी बनी सहमति, होर्मुज पर भी मिलेगा साथ

सार

ईरान-अमेरिका संघर्ष से उत्पन्न ऊर्जा संकट में भारत रूस का सहयोगी बनेगा। अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद भारत रूस से कच्चा तेल और एलएनजी आयात बढ़ा रहा है। योजना है कि देश की ऊर्जा जरूरत का लगभग 40% हिस्सा रूस से पूरा होगा और व्यापार रुपया-रूबल में होगा।

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भारत और रूस प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : FERRPIC
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विस्तार
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ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट में रूस एक बार फिर भारत का संकट मोचक बनेगा। अमेरिकी प्रतिबंध में मिली ढील का लाभ उठाते हुए भारत न सिर्फ रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाएगा, बल्कि दोनों देशों के बीच एलएनजी आपूर्ति पर भी सहमति बन गई है। भारत की योजना अपनी ऊर्जा जरूरत का 40 फीसदी हिस्सा रूस से आयात करने की है। खास बात यह है कि द्विपक्षीय व्यापार रुपया-रूबल के माध्यम से होगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को बूस्टर डोज मिलेगा।

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दरअसल पश्चिम एशिया की विकट परिस्थिति के कारण अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल-गैस आयात पर छूट दी है। भारत ने इस छूट का दोतरफा लाभ उठाने की योजना बनाई है। एक तरफ उसने रूस से कच्चे तेल के साथ एलएनजी के आयात की ओर कदम बढ़ाया है तो दूसरी ओर भारत ईरान से भी कच्चे तेल और गैस के आयात की दिशा में अपने कदम आगे बढ़ाने का फैसला किया है।

कूटनीतिक लाभ भी
सरकार के वरिष्ठ मंत्री ने रूस से तेल-गैस आयात पर बनी सहमति की जानकारी देते हुए बताया कि रूस पश्चिम एशिया संकट में कई मोर्चे पर भारत का मददगार साबित हो सकता है। कूटनीतिक मोर्चे पर भारत को रूस के ईरान के करीबी होने का लाभ मिलेगा। खासतौर से होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही में बाधा को टालने में रूस की मदद मिलेगी। दूसरा रूस से व्यापार का रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं है। उक्त मंत्री के मुताबिक युक्रेन युद्घ से अब तक भारत ने रूस से 44 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया है। अब हम 40 फीसदी ऊर्जा जरूरतें रूस से पूरा करना चाहते हैं।
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ईरान के लिए अलग रणनीति
ऊर्जा संकट से पार करने के लिए भारत ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध में मिली ढील का भी लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। उक्त मंत्री के मुताबिक नई परिस्थितियों में भारत देख रहा है कि उसे ईरान से तेल और गैस के मामले में क्या हासिल हो सकता है। जो भी सहमति बनेगी, उसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत के लिए संकट उत्पन्न नहीं करेगा। अभी ईरान की रणनीति उन खाड़ी देशों को सबक सिखाने की है, जहां अमेरिकी सैन्य बेस है।
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