कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान।
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गलवां घाटी में खूनी झड़प के बाद भारत-चीन के बीच तनाव चरम पर है। 20 जांबाजों को गंवाने से देश गुस्से में है। गलवां घाटी में भारत का सड़क बनाना चीन को पच नहीं रहा है, हालांकि यह सड़क पूरी तरह भारतीय सीमा है। ‘मुंह में राम बगल में छुरी’ के लिए मशहूर चीनियों ने हर मौके पर दोहरी चाल चली। इस पूरे घटनाक्रम पर विश्व मीडिया ने क्या कुछ कहा, यहां पढ़िए...
चीन की कार्रवाई चौंकाने वाली : न्यूयॉर्क टाइम्स
मौजूदा दौर में भारत और चीन दोनों ही परमाणु शक्तियां हैं। दोनों जगह राष्ट्रवादी नेता सत्ता में हैं, जो संघर्ष में पीछे हटने को तैयार नहीं होंगे। चीनी सैनिकों ने जो कार्रवाई की है वह एक चौंकाने वाली है। अच्छा होगा कि दोनों देश शांति बनाए रखें।
विस्तारवादी नीति खतरनाक : गार्जियन
दो परमाणु संपन्न देशों के बीच दुनिया की सबसे दुर्गम जगह पर पत्थरों-डंडों से खूनी टकराव हुआ। चीन की विस्तारवादी नीति खतरनाक है।
चीन ताकतवर लेकिन भारत भी कम नहीं : सीएनएन
चीन की यह कार्रवाई निश्चित रूप से भारत को उकसाने वाली है। यह तय है कि चीन ताकतवर है लेकिन भारत भी कम शक्तिशाली नहीं।
चीनी गतिविधियों से भारत की चिंता लाजमी : द इकोनॉमिस्ट
जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग करने के भारत के फैसले से चीन का नाराज है। उधर, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका में चीन की आर्थिक व राजनीतिक दिलचस्पी से भारत का चिंतित होना लाजमी है।
अमेरिका बनेगा भारत का मजबूत साथी : अल-जजीरा
इस समय चीन-अमेरिका में भी तनाव है। ऐसे में मोदी के पास राष्ट्रपति ट्रंप जैसा मजबूत साथी है। भारत में चूंकि प्रधानमंत्री काफी सशक्त हैं, इसलिए उनको जनता और मीडिया का पूरा सहयोग मिलना तय है।