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UNHRC: 'पाकिस्तान आतंकवाद का प्रायोजक, उससे कुछ भी सबक लेने की जरूरत नहीं'; यूएन में भारत ने सुनाई खरी-खरी

Thu, 11 Sep 2025 04:31 AM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
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क्षितिज त्यागी, यूएन में भारतीय प्रतिनिधि - फोटो : ANI
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान को जमकर फटकार लगाई। भारत ने कहा कि उसे ऐसे आतंकवाद के प्रायोजक से सबक लेने की आवश्यकता नहीं है जो वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले नेटवर्कों को वित्तपोषित और पनाह दे रहा है।

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जिनेवा स्थित भारत के स्थायी मिशन के सलाहकार क्षितिज त्यागी ने कहा, हम एक बार फिर उस देश के उकसावे का जवाब देने के लिए बाध्य हैं, जिसके नेतृत्व ने हाल ही में इसकी तुलना डंप ट्रक से की थी।  मानवाधिकार परिषद के 60वें सत्र में पाकिस्तान की ओर से भारत के संबंध में की गई टिप्पणी के बाद उत्तर देने के अधिकार के तहत त्यागी ने यह बातें कही। त्यागी ने कड़े संदेश में पहलगाम के नरसंहार को याद किया, जहां इस वर्ष अप्रैल में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों ने खुशी के माहौल को हत्या के मैदान में बदल दिया था। उन्होंने कहा, ऐसा न हो कि हम 9/11 को भूल जाएं, क्योंकि बृहस्पतिवार को विश्व इसकी वर्षगांठ मना रहा है। हम आज उनके पाखंड को देख रहे हैं जिन्होंने इसके मास्टरमाइंड को शरण दी और उसे शहीद के रूप में महिमामंडित किया।  

'पाकिस्तान का अस्तित्व ही आतंकवाद और झूठे प्रचार पर टिका है'
उन्होंने पाकिस्तान पर सीधा हमला करते हुए कहा कि उसका अस्तित्व ही आतंकवाद और झूठे प्रचार पर टिका है। 'हम फिर से मजबूर हैं कि उस देश की उकसावे की बातों का जवाब दें, जिसके नेता ने हाल ही में अपने देश की तुलना कूड़ा ढोने वाले ट्रक से की थी। यह तुलना सही बैठती है क्योंकि पाकिस्तान लगातार पुराने झूठ और बासी प्रोपेगेंडा इस मंच पर लेकर आता है।' क्षितिज त्यागी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन को भी अपने हित में इस्तेमाल करता है और भारत के खिलाफ उसकी बीमारी जैसी जुनूनी सोच उसके लिए अस्तित्व का सहारा बन गई है।
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स्विट्जरलैंड की टिप्पणी आश्चर्यजनक वह अपनी चुनौतियों पर ध्यान दे : भारत
भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में अल्पसंख्यकों के बारे में स्विट्जरलैंड की टिप्पणियों को आश्चर्यजनक और अज्ञानतापूर्ण बताया है। भारतीय राजनयिक ने कहा कि देश को नस्लवाद, व्यवस्थित भेदभाव और विदेशी-द्वेष जैसी अपनी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यूएनएचआरसी की अध्यक्षता स्विट्जरलैंड के पास है, इसलिए वह और भी सोच-समझकर बयान दें।

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