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यूएन में भारत की दो-टूक: 80 साल पुरानी व्यवस्था बदलने की उठाई मांग, कहा- सुरक्षा परिषद में अब सुधार जरूरी

Wed, 15 Jul 2026 10:13 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी एएनआई, न्यूयॉर्क

सार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों की मांग दोहराते हुए सुरक्षा परिषद के विस्तार, महासभा के पुनरुद्धार और ईसीओएसओसी को मजबूत करने पर जोर दिया। भारत ने कहा कि 80 वर्ष पुरानी सुरक्षा परिषद की संरचना आज की चुनौतियों के अनुरूप नहीं है और वैश्विक शासन संस्थानों में जल्द सुधार आवश्यक हैं।
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यूएन में भारतीय राजदूत पार्वथानेनी हरीश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत ने मंगलवार (स्थानीय समय) को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में व्यापक सुधारों के लिए अपनी मांग दोहराई। इसके साथ ही बहुपक्षवाद को भविष्य के लिए उपयुक्त बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार, महासभा को पुनर्जीवित करने और आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) की भूमिका को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

राजदूत हरीश परवथानेनी ने क्या कहा?

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भविष्य के लिए समझौते की समीक्षा हेतु संयुक्त राष्ट्र महासभा की अनौपचारिक बैठक के दौरान बहुपक्षवाद को भविष्य के अनुरूप बनाना' विषय पर आयोजित मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश परवथानेनी ने कहा, 'भारत के लिए, बहुपक्षवाद को भविष्य के अनुरूप बनाने की शुरुआत यह सुनिश्चित करने से होती है कि वैश्विक संस्थाएं समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करें।

उन्होंने आगे कहा कि यह सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार, महासभा के पुनरुद्धार और आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय तीनों आयामों में सतत विकास को आगे बढ़ाने में ईसीओएसओसी की मजबूत भूमिका की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।'

संघर्षों को लेकर क्या कहा? 

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उन्होंने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र के बारे में जनता की धारणा हाल के दिनों में प्रतिकूल रूप से बदल गई है, जिसका मुख्य कारण विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों में सुरक्षा परिषद की सार्थक हस्तक्षेप करने में असमर्थता है। सुरक्षा परिषद प्रभावित आबादी के बीच मानवीय पीड़ा को समाप्त करने में अप्रभावी रही है। इसलिए, संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का मूल सिद्धांत अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना सवालों के घेरे में आ गया है।'

परिषद की कमियां का क्या कारण?
उन्होंने तर्क दिया कि परिषद की कमियां इसकी पुरानी संरचना के कारण हैं। उन्होंने कहा, 'सुरक्षा परिषद की कमियों का मूल कारण स्पष्ट है। 1940 के दशक के लिए बनाई गई अस्सी साल पुरानी संरचना समकालीन चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ है। एक संगठन के रूप में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार लाने में कोई खास प्रगति नहीं कर पाया है। अब तक की चर्चाएं आईएनजी ढांचे के तहत तैयार बयानों के अंतहीन चक्र तक ही सीमित रही हैं। कार्रवाई बिंदु 39 से 41 काफी हद तक कागजों पर ही रह गए हैं। यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है और इसमें बदलाव होना चाहिए।'

भविष्य के समझौते का जिक्र करते हुए भारतीय राजदूत ने कहा कि अंतर-सरकारी वार्ताओं (आईजीएन) के कार्य बिंदुओं का मसौदा समझौते के सह-सुविधाकर्ताओं के बजाय तत्कालीन आईजीएन सह-अध्यक्षों द्वारा तैयार किया गया था।  उन्होंने यह भी कहा कि भारत को उन प्रावधानों पर महत्वपूर्ण आपत्तियां हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत रचनात्मक भावना से समझौते का समर्थन करता है।

वैश्विक शासन सुधारों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा, 'भारत इस बात पर जोर देता है कि हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों सहित वैश्विक शासन संस्थानों में सुधारों को लागू करने के सभी वास्तविक प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेंगे। हमारा संयुक्त प्रयास इन संस्थानों को उनके उद्देश्य के लिए उपयुक्त बनाना होना चाहिए, ताकि वे मानवता की वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हों।

 

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