भारत ने मंगलवार (स्थानीय समय) को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में व्यापक सुधारों के लिए अपनी मांग दोहराई। इसके साथ ही बहुपक्षवाद को भविष्य के लिए उपयुक्त बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार, महासभा को पुनर्जीवित करने और आर्थिक और सामाजिक परिषद (ईसीओएसओसी) की भूमिका को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
राजदूत हरीश परवथानेनी ने क्या कहा?
संघर्षों को लेकर क्या कहा?
परिषद की कमियां का क्या कारण?
उन्होंने तर्क दिया कि परिषद की कमियां इसकी पुरानी संरचना के कारण हैं। उन्होंने कहा, 'सुरक्षा परिषद की कमियों का मूल कारण स्पष्ट है। 1940 के दशक के लिए बनाई गई अस्सी साल पुरानी संरचना समकालीन चुनौतियों का सामना करने में असमर्थ है। एक संगठन के रूप में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार लाने में कोई खास प्रगति नहीं कर पाया है। अब तक की चर्चाएं आईएनजी ढांचे के तहत तैयार बयानों के अंतहीन चक्र तक ही सीमित रही हैं। कार्रवाई बिंदु 39 से 41 काफी हद तक कागजों पर ही रह गए हैं। यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है और इसमें बदलाव होना चाहिए।'
भविष्य के समझौते का जिक्र करते हुए भारतीय राजदूत ने कहा कि अंतर-सरकारी वार्ताओं (आईजीएन) के कार्य बिंदुओं का मसौदा समझौते के सह-सुविधाकर्ताओं के बजाय तत्कालीन आईजीएन सह-अध्यक्षों द्वारा तैयार किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को उन प्रावधानों पर महत्वपूर्ण आपत्तियां हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत रचनात्मक भावना से समझौते का समर्थन करता है।
वैश्विक शासन सुधारों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा, 'भारत इस बात पर जोर देता है कि हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों सहित वैश्विक शासन संस्थानों में सुधारों को लागू करने के सभी वास्तविक प्रयासों का समर्थन करना जारी रखेंगे। हमारा संयुक्त प्रयास इन संस्थानों को उनके उद्देश्य के लिए उपयुक्त बनाना होना चाहिए, ताकि वे मानवता की वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हों।