चीन द्वारा हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति बढ़ाए जाने के मद्देनजर स्वराज का यह बयान काफी महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि नये सिल्क रूट के निर्माण के तहत राष्ट्रपति शी चिनफिंग की 'वन बेल्ट, वन रोड' पहल में हिंद महासागर प्रमुखता से आता है।
वहीं भारत चीन के 'वन बेल्ट, वन रोड' का विरोध करता है क्योंकि इसके तहत बन रहा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है। स्वराज ने कहा कि हिंद महासागर का आर्थिक महत्व और क्षेत्र के देशों की समृद्धि और विकास में उसकी भूमिका पहले से स्थापित है।
उन्होंने कहा, 'यह क्षेत्र दुनिया का सबसे व्यस्त जलमार्ग है और इससे होकर गुजरने वाले तीन-चौथाई वाहन हमारे क्षेत्र से बाहर जाते हैं।' उन्होंने कहा, हिंद महासागर व्यापार और ईंधन के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग है। दुनिया के आधे कंटेनर शिपमेंट, करीब एक-तिहाई माल और दो-तिहाई तेल के शिपमेंट इसी के रास्ते होकर जाते हैं।
ऐसे में हिंद महासागर अपने तटों और तटवर्ती क्षेत्रों में बसे देशों से आगे बढ़कर सभी के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। स्वराज ने कहा, इसलिए क्षेत्र में शांति और स्थिरता हमारी विदेश नीति की प्राथमिकता है।