अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन को दुनिया की अखंडता के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा, चीन अपनी विस्तारवादी दृष्टिकोण के चलते पड़ोसी मुल्कों की संप्रभुता के लिए खतरा बन गया है। पोम्पियो ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर चीन की करतूत का जिक्र करते हुए कहा, चीन और भारत के बीच हिमालय में जो संघर्ष हुआ वह अलिखित नियमों के मुताबिक किया गया।
ऐसी चीजों पर नियंत्रण होना जरूरी है। चीन की आक्रामकता का जवाब देना होगा। चीनी कम्यूनिस्ट पार्टी की धमकियाें का हममें से उन सभी ने विरोध किया जो मानते हैं कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी है। पोम्पियो ने कहा, अब वक्त है कि हम अपने लोगों और भागीदारों को सीसीपी (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना) के शोषण, भ्रष्टाचार और जबरदस्ती से बचाने के लिए सहयोग करें ताकि क्षेत्रीय अखंडता न प्रभावित हो।
क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान जरूरी
‘क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान बेहद जरूरी है। हम नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय आदेश को बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। कानून, पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय समुद्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के लिए सम्मान और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। - एस जयशंकर, विदेश मंत्री
एस जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि क्वाड सम्मेलन से इतर ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री मारिसे पेने से मुलाकात हुई। हमारे बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। ऑस्ट्रेलिया ने तमाम वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही है।
इसके अलावा कोरोना से जंग में भी दोनों देश आपसी सहयोग को बढ़ाएंगे। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बीते कुछ वर्षों में रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में भागीदारी मजबूत हुई है। दोनों देश हिंद प्रशांत क्षेत्र में भी सैन्य सहयोग बढ़ा रहे हैं।
आगे भी इस दिशा में भागीदारी बढ़ाने पर सहमति बनी है। इस वर्ष 4 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम स्कॉट मौरिसन के बीच सामरिक साझेदारी बढ़ाने पर हुए करार हुआ था। दोनों देशा उन सहमतियों को लागू करने की दिशा में काम करेंगे।