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चीन के ब्रह्मपुत्र पर बांध बनाने से भारत से छिड़ सकती है पानी के लिए जंग

Mon, 25 Jan 2021 04:33 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, हांगकांग।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित नदी ब्रह्मपुत्र पर चीन बांध बनाने की योजना बना रहा है। माना जा रहा है कि चीन की इस योजना से भविष्य में पानी के लिए जंग छिड़ सकती है।

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एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में ब्रह्मपुत्र को यारलुंग जांगबाओ कहा जाता है, जिस पर वह विशाल बांध बनाने जा रहा है। यह नदी तिब्बत से होकर बहती है, जब यह भारत में प्रवेश करती है तो इसे ब्रह्मपुत्र कहा जाता है। भारत और बांग्लादेश के साथ पानी के बंटवारे से संबंधित समझौता या चर्चा किए बिना ही चीन यरलुंग जांगबाओ बांध की अपनी योजना पर अमल करने जा रहा है।

एशिया टाइम्स के मुताबिक, चीन से अच्छे संबंध रखने वाले बांग्लादेश में यारलुंग जांगबाओ बांध को लेकर व्यापक विरोध हो रहा है। लेखक बर्तिल लिंटर ने लिखा, इस विशाल बांध के बारे में तकनीकी जानकारी का अभाव है।
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हालांकि, क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यांगशी नदी पर तीन बडे़ बांध बनाए जा रहे हैं, जो चीन में वितरण के लिए तीन गुना से भी ज्यादा बिजली पैदा करेंगे। ब्रह्मपुत्र और ग्लेशियर चीन से ही निकलते हैं।

ऊपरी इलाके में होने से चीन बेहतर स्थिति में है और नीचे बहने वाले पानी के बहाव को बांध बनाकर रोक सकता है। इस बांध के बनने से चीन के भारत समेत अपने पड़ोसियों के साथ संबंध और तल्ख हो सकते हैं।

मेकांग नदी पर बांध बनने से म्यांमार, वियतनाम में आती है बाढ़
चीन ने मेकांग नदी पर विशाल बांध बना रखा है। जब भी वह बिना नोटिस के जलस्तर को बढ़ाता है, तो म्यांमार, लाओस, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम में भीषण बाढ़ आती है।

इससे पहले दिसंबर में चीन ने मेकांग के जलस्तर को काफी कम कर दिया था और इस बारे में नदी के निकटवर्ती देशों को इस बारे में उसने सूचना भी नहीं दी। नतीजतन पहले से तैयारी नहीं कर पाने की वजह से थाईलैंड और लाओस समेत कई देशों में जहाजों के चलने और व्यापार में बाधा पहुंची थी। 

राजनीतिक संकट के समय फायदा उठा सकता है चीन
विश्लेषकों का आकलन है कि ब्रह्मपुत्र का पानी भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इस पानी से ही निकटवर्ती इलाके खेती की सिंचाई पर निर्भर हैं। भारत और बांग्लादेश को इस बात की चिंता सताती रहती है कि राजनीतिक विवाद की स्थिति में फायदा उठाने के लिए चीन इस बांध के जरिये पानी का रुख मोड़ सकता है या फिर उसका संग्रह कर सकता है।

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