भारत और अमेरिका चाहते हैं कि पाकिस्तान आतंकी संगठन और उसके नेताओं को खिलाफ वास्तविक और स्थिर कार्रवाई करे। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कहना है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए तैयार हैं। बुधवार को विदेश सचिव विजय गोखले के साथ बैठक के दौरान अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भारत के प्रति अमेरिका का समर्थन व्यक्त किया।
बैठक के बाद बोल्टन ने ट्वीट करके कहा, 'भारत के विदेश सचिव गोखले के साथ भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी और हमारी साझा दृष्टि पर मुलाकात की। इसके अलावा यह बात दोहराई गई कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा।' पुलवामा हमले के बाद बोल्टन और अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो भारत-अमेरिका संबंधों के प्रबल समर्थक बनकर उभरे थे।
भारतीय दूतावास ने एक बयान में कहा, 'दोनों देशों ने अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में स्थित आतंकवादी समूहों के खिलाफ पाकिस्तान को ठोस और अपरिवर्तनीय कार्रवाई करने के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही कहा कि सीमापार आतंकवाद को अंजाम देने वाले इन समूहों के लिए उसे सुरक्षित पनाह बनने से इनकार करना होगा।'
हालांकि अमेरिका का यह समर्थन ऐसे समय पर आया है जब चीन ने एक दिन पहले चौथी बार मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने के मार्ग में अड़ंगा लगाया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया था। जिसपर वीटो का इस्तेमाल करते हुए चीन ने इसे टेक्निकल होल्ड पर रख दिया है। उसका कहना है कि उसे प्रस्ताव की जांच के लिए अधिक समय चाहिए।
14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद बोल्टन ने भारत के अपने समकक्ष अजीत डोभाल से कहा था कि भारत के पास आत्मरक्षा करने का अधिकार है और हम आतंक के खिलाफ लड़ाई में उसके साथ हैं। सीआरपीएफ के काफिले पर किए गए आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारत ने 26 फरवरी की तड़के पाकिस्तान के बालाकोट स्थित जैश के आतंकी कैंपों पर बमबारी करके उन्हें नष्ट कर दिया था।