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UN: रूस-यूक्रेन के बीच बिना शर्त सीजफायर की मांग वाला मसौदा प्रस्ताव, भारत ने मतदान से किया परहेज

Tue, 24 Feb 2026 11:33 PM IST
लव गौर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र

सार

UN General Assembly: भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक ड्राफ्ट प्रस्ताव पर वोट नहीं दिया, जिसमें रूस और यूक्रेन के बीच तुरंत, पूरी तरह और बिना शर्त सीजफायर की मांग की गई थी।
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संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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रूस-यूक्रेन संघर्ष के चार वर्ष पूरे होने पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में लाए गए शांति प्रस्ताव पर भारत ने एक बार फिर अपना स्वतंत्र और तटस्थ रुख स्पष्ट किया है। मंगलवार (24 फरवरी) को महासभा में यूक्रेन द्वारा प्रस्तुत स्थायी शांति के समर्थन वाले मसौदे पर मतदान के दौरान भारत ने हिस्सा नहीं लिया। 193 सदस्यीय महासभा में इस प्रस्ताव को 107 देशों के समर्थन के साथ अपनाया गया, जबकि भारत, चीन, ब्राजील और यूएई सहित 51 देशों ने मतदान से दूरी बनाए रखी।
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 51 देशों ने मतदान से परहेज किया
‘यूक्रेन में स्थायी शांति के समर्थन’ शीर्षक वाला यह प्रस्ताव रूसी हमले की चौथी वर्षगांठ पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया गया। 193 सदस्यीय महासभा में हुए मतदान में 107 देशों ने इसके पक्ष में वोट दिया, 12 ने विरोध किया, जबकि 51 देशों ने मतदान से परहेज किया।

भारत के अलावा इन देशों ने भी बनाई दूरी
भारत उन 51 देशों में शामिल रहा जिन्होंने मतदान से दूरी बनाई। प्रस्ताव को कीव द्वारा पेश किया गया था। भारत के अलावा बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका भी मतदान से परहेज करने वालों में शामिल थे। प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप न्यायसंगत, व्यापक और स्थायी शांति की अपील दोहराई गई। साथ ही युद्धबंदियों की पूर्ण अदला-बदली, अवैध रूप से हिरासत में रखे गए लोगों की रिहाई और जबरन स्थानांतरित या निर्वासित किए गए नागरिकों-विशेषकर बच्चों की वापसी को विश्वास-निर्माण उपाय बताया गया।
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कूटनीतिक नीति के अनुरूप भारत का कदम
यह प्रस्ताव यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम का आह्वान करता है। प्रस्ताव में बंदियों की रिहाई और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। भारत का यह कदम उसकी उस कूटनीतिक नीति के अनुरूप है, जिसमें वह निरंतर बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर देता रहा है।

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इसके अलावा प्रस्ताव में रूस द्वारा नागरिकों, नागरिक ठिकानों और ऊर्जा अवसंरचना पर जारी हमलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई तथा मानवीय स्थिति के और बिगड़ने पर भी गहरी चिंता जताई गई।

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