अंतरिक्ष में लगातार बढ़ रहा कचरा पृथ्वी की कक्षा के लिए घातक होता जा रहा है। यह केसलर सिंड्रोम के रूप में टकरावों की पूर्व चेतावनी दे रहा है। इससे पृथ्वी की कक्षा में उपग्रहों का इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा। केसलर सिंड्रोम, पृथ्वी की कक्षा में अंतरिक्ष कचरे से होने वाली समस्या का एक सैद्धांतिक मॉडल है। इसके अनुसार अंतरिक्ष में कचरा बढ़ने से पृथ्वी की कक्षा में टकराव बढ़ेंगे और इससे और ज्यादा कचरा पैदा होगा। इस तरह अंतरिक्ष में कचरे की समस्या और बढ़ती जाएगी। इससे और ज्यादा कचरा पैदा होगा।
नासा के वैज्ञानिक डोनाल्ड जे. केसलर ने 1978 में इस सिद्धांत को पेश किया था, इसलिए इसे उन्हीं के नाम से जाना जाता है। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि केसलर सिंड्रोम एक ऐसे प्रभाव की कल्पना करता है जिसमें एक टकराव से निकलने वाला मलबा बाद के प्रभावों को आगे बढ़ता है। इसकी वजह से अंतरिक्ष में मलबे का एक खतरनाक बादल बनता है जो दशकों या उससे भी अधिक समय तक उपग्रह संचालन और अंतरिक्ष अन्वेषण में रुकावट पैदा कर सकता है।
1 से 10 सेमी के बीच के हैं लगभग 9 लाख टुकड़े
2024 तक लगभग 80 विभिन्न सरकारी अंतरिक्ष एजेंसियां अस्तित्व में थीं। इनमें 70 से अधिक राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियां और कई अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां शामिल हैं। यह सब अंतरिक्ष में सक्रिय हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का अनुमान है कि पृथ्वी की कक्षा में 10 सेमी से बड़े मलबे के 34 हजार से ज्यादा टुकड़े हैं। नासा का कहना है कि जनवरी 2019 तक अनुमान लगाया गया था कि 1 सेमी (0.39 इंच) से छोटे मलबे के 12.8 करोड़ से अधिक टुकड़े हैं और 1 से 10 सेमी के बीच लगभग 9 लाख टुकड़े हैं।
लगातार बढ़ रहा अंतरिक्ष में खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे 47,000 से अधिक पता लगाई गई चीजें और अनगिनत छोटे टुकड़ों के साथ खतरे और भी अधिक बढ़ रहे हैं। हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन इन संभावित टकरावों से बचने के लिए कई अभ्यास करता है और उपग्रह संचालकों को अक्सर चेतावनी मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि केसलर सिंड्रोम सबसे खराब स्थिति है, जहां कक्षा में एक भी टकराव या विस्फोट मलबे के प्रभावों की एक शृंखला शुरू कर देता है, जिससे अंतरिक्ष में कबाड़ की मात्रा में तेजी से वृद्धि होती है।
10 सेमी या उससे ज्यादा का टुकड़ा बड़े मलबे में शामिल
बड़े मलबे की गिनती 10 सेमी या उससे बड़े के रूप में होती है। इनकी संख्या 2019 में 34,000 थी और जून 2023 तक कम से कम 37,000 हो गई। इसके अलावा लाखों ऐसी छोटी वस्तुएं हैं जिन्हें ट्रैक करना ज्यादा मुश्किल है।