कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते फ्रांस के कई शहरों में अलर्ट जारी कर दिया गया है, इसमें पेरिस और मार्सिले भी शामिल हैं। संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए फ्रांस में नए दिशा-निर्देशों को लागू किया गया है। दक्षिण में मोंटपेलियर के प्रांत ने शहर में ज्यादा अलर्ट की घोषणा की है।
नए निर्देशों के तहत बार और कैफे को बंद रखने का फैसला लिया गया है। वहीं शनिवार को कोरोना वायरस के बढ़ते मामले और अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ने से फ्रांस के चार और शहरों को अलर्ट पर कर दिया गया है। इसमें दक्षिण-पश्चिम में ल्योन, ग्रेनोवल और सेंट-एटिनी और उत्तर में लिली शहर है।
फ्रांस के राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को 24 घंटों में 26,900 नए मामले दर्ज किए। हालांकि रविवार को 16,100 नए मामले सामने आए लेकिन पॉजिटिव टेस्ट की दर 11.5 फीसदी तक बढ़ गई। पिछले एक हफ्ते में अस्पताल में 5,100 नए मरीज भर्ती किए गए, जिसमें से 910 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं।
रविवार तक जारी किए आंकड़ों के मुताबिक फ्रांस में अब तक 32,730 लोगों की कोविड-19 से मौत हो चुकी है लेकिन फ्रांस में मौत का आंकड़ा वास्तव में इससे ज्यादा है क्योंकि कई मरीजों की मृत्यु उनके घरों में हुई है, जिसकी गणना नहीं की गई है। इसके अलावा अस्पताल से भी अधूरे मामले दर्ज किए गए हैं।
इतने आंकड़े तब हैं, जब फ्रांस ने कोरोना की गंभीर स्थिति के समय अपनी कमर कस ली थी। रविवार को प्रकाशित नर्सों के राष्ट्रीय क्रम का विश्लेषण कर एक बात सामने आई है कि ज्यादातर नर्स थकान और तंग सा महसूस करने लगे हैं और 37 फीसदी का कहना है कि कोरोना महामारी ने उन्हें अपनी नौकरी बदलने के लिए मजबूर कर दिया है।
एक सर्वे बताता है कि फ्रांस ने अपनी मेडिकल सुविधाओं की बढ़ती जरूरतों में तालमेल नहीं बैठाया। नर्सों के राष्ट्रीय क्रम बताता है कि फ्रांस में अभी 34,000 नर्सों की नौकरी खाली है। फ्रांस और दूसरी जगह नर्सों और दूसरे मेडिकल कर्मचारियों ने अच्छे वेतन, अच्छी कार्य स्थिति और निजी हित के लिए छिटपुट विरोध प्रदर्शन किए।
इन लोगों को फ्रांस में कम वेतन दिया जा रहा था। नर्सों के राष्ट्रीय क्रम के अध्यक्ष पैट्रिक का कहना है कि आज नर्सों को कोविड-19 की स्थिति से निपटने के लिए सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि नर्स थक चुकी हैं, उन्हें टेंशन है, थकावट है और काफी ज्यादा काम है। हमें नर्सों की देखभाल करनी चाहिए।