पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब से ली गई एक अरब डॉलर की रकम को यह दोहराते हुए लौटाया है कि इस्लामाबाद धीरे-धीरे अन्य मुस्लिम देशों का समर्थन खो रहा है। पाक ने सऊदी से 3 अरब के नगद कर्ज के बदले में एक अरब डॉलर की राशि वापस की है। इसका एक कारण यह माना जा रहा है कि सऊदी ने कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के संबंध में उसका साथ नहीं दिया।
उच्च पदस्थ सूत्रों का हवाला देते हुए पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया कि पाकिस्तान ने यह फैसला सऊदी अरब द्वारा उसे वित्तीय समर्थन घटाने के फैसले के बाद किया।
पाक के अन्य अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के बाद से पाकिस्तान लगातार इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक पर जोर दे रहा है, जबकि सऊदी अरब ने इस्लामाबाद के इस अनुरोध को स्वीकार करने में अनिच्छा दिखाई है।
यह भी बताया जा रहा है कि सऊदी अरब का कर्ज लौटाने के लिए पाकिस्तान ने सदाबहार दोस्त चीन से एक अन्य कर्ज लिया है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान द्वारा सऊदी को कश्मीर पर साथ न देने पर चेतावनी तक दी गई। इससे नाराज होकर सऊदी ने पाक से अपना वित्तीय समर्थन वापस ले लिया।
मालदीव ने दिया भारत का साथ
इमरान खान के कश्मीर मुद्दे पर ओआसी सदस्यों का समर्थन जुटाने में नाकाम रहने के बाद पाकिस्तान ने अपने एजेंडे में भारत के भीतर बढ़ते इस्लामोफोपिया के मुद्दे को भी उठाने की कोशिश की। लेकिन भारत के सहयोगी मालदीव ने पाकिस्तान के इस कदम को भी विफल कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में मालदीव के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि भारतीय संदर्भ में इस तरह के आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत होंगे।
सऊदी से 6.2 अरब डॉलर का मिला था वित्तीय पैकेज
पाकिस्तान को सऊदी अरब से अक्तूबर 2018 में 6.2 अरब डॉलर का वित्तीय पैकेज मिला था जिसमें से तीन अरब डॉलर नगद और शेष रकम के एवज में पाक को तेल व गैस आपूर्ति की जानी थी। शुरुआत में यह पैकेज एक साल के लिए मिला था जिसे बाद में तीन साल तक के लिए कर दिया गया। लेकिन पाकिस्तानी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी ने यह वित्तीय समर्थन भी वापस ले लिया है।