यमन
अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी यमन में भी है। ये यहां भी अल-कायदा से मोर्चा ले रहे हैं। ट्रंप सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस को जो रिपोर्ट भेजी है उसमें बताया गया है कि अमेरिका आंशिक रूप से यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के नेतृत्व वाले बल को मदद कर रही है। यह मदद केवल सैन्य स्तर पर ही नहीं है बल्कि खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के स्तर पर भी है।
सोमालिया
सोमालिया में अमेरिका के 300 लोग हैं। ये सोमालिया स्थित चरमपंथी संगठन अल-शबाब के खिलाफ ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं। 1993 में सोमालिया में अमेरिकी बलों को कड़वे अनुभव से गुजरना पड़ा था। तब अमेरिकी सैनिक मोहम्मद फराह अईदीद को पकड़ने के लिए अभियान चला रहे थे। इस ऑपरेशन के दौरान ही साबित हो गया था कि सोमालिया में सैन्य अभियान चलाना कितना मुश्किल है। इस अभियान में 18 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।
लीबिया
लीबिया में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी बहुत छोटी है।
अमेरिकी कांग्रेस को भेजी रिपोर्ट में ट्रंप प्रशासन ने बताया है कि अमेरिकी सैनिक इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रहे हैं। लीबिया में गद्दाफी का शासन खत्म होने के बाद से यहां अशांति का माहौल बना हुआ है।
नाइजर
नाइजर में अमेरिका के करीब 500 सक्रिय सैनिक मौजूद हैं। अक्टूबर 2017 में चार अमरिकी सैनिकों के मारे जाने के बाद से यहां इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अभियान जारी है। अमेरिका में इन सैनिकों की मौत को लेकर बहस भी हो रही है। अमेरिका के लिए पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजर में सैनिकों की मौजदूगी बिल्कुल नई बात थी।