अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी शासित राज्यों में मताधिकार को संकुचित करने और मतदान करने को और मुश्किल बनाने की लगी होड़ तेज होती जा रही है। अब एक बड़े राज्य टेक्सास की विधायिका में इस बारे में कई बिल पेश किए गए हैं। पिछले नवंबर में हुए चुनाव में देश भर में रिकॉर्ड मतदान हुआ था। उसका लाभ डेमोक्रेटिक पार्टी को मिला। टेक्सास राज्य में हालांकि डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडंन हार गए थे, लेकिन उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी टक्कर दी थी।
अब टेक्सास की कांग्रेस (विधायिका) में रिपब्लिकन पार्टी के दो दर्जन सदस्यों ने एक बिल पेश किया है, जिसमें मतदाता सूची तैयार करने और मतदान के समय मतदाता की पहचान की प्रक्रिया को सख्त बनाने, मतदान के दिन से पहले मतदान करने पर सीमा लगाने, आदि जैसे प्रावधान हैं। इस बिल में प्रावधान है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों को ज्यादा कड़ी सज़ा दी जाए। ये बिल राज्य के रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट की सहमति मिलने के बाद पेश हुआ। एबॉट ने कहा कि हमें ऐसा कानून जरूर बनाना चाहिए, जिससे चुनाव अधिकारी चुनाव प्रक्रिया को खतरे में ना डाल सकें।
बिल पेश करने वाले सीनेटर ब्रायन ह्यूज ने कहा है कि 2020 के चुनाव में हुए अनुभव के कारण इस बिल में लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। उस चुनाव के नतीजे को लेकर बहुत से लोगों के मन में सवाल और चिंताएं पैदा हुईं, जो आज भी बनी हुई हैं। गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के नेता डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले चुनाव में अपनी हार को स्वीकार नहीं किया। वे यही दावा करते रहे कि उन्हें धांधली से हराया गया।
हालांकि उन्होंने धांधली के कोई सबूत नहीं दिए, फिर भी उनकी बातों पर रिपब्लिकन समर्थकों ने बड़े पैमाने पर यकीन किया। जनमत सर्वेक्षणों से सामने आया कि दो तिहाई से ज्यादा रिपब्लिकन समर्थक मानते हैं कि ट्रंप को गलत ढंग से हराया गया। माना जा रहा है कि पार्टी समर्थकों की इसी भावना को देखते हुए अब रिपब्लिकन शासित राज्यों में मताधिकार संकुचित करने के उपाय किए जा रहे हैं।
टेक्सास राज्य में वहां के अटार्नी जनरल केन पैक्सटॉन ने मतदान में धोखाधड़ी की जांच की। टीवी चैलन एनबीसी के मुताबिक ये जांच 22 हजार घंटों तक चली। लेकिन इस दौरान सिर्फ 16 ऐसे मामले सामने आ सके, जिनमें मतदाता ने पंजीकरण फॉर्म पर अपना गलत पता लिखवाया था। जबकि टेक्सास में रजिस्टर्ड कुल मतदाताओं की संख्या एक करोड़ 70 लाख थी।
विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे नगण्य साक्ष्य के बावजूद रिपब्लिकन पार्टी शासित राज्यों ने मतदान को संकुचित करने के उपाय लागू करने में अपना पूरा जोर लगा दिया है। टेक्सास में पहले से ही मतदान को लेकर सख्त शर्तें थीं। अब उन्हें और सख्त बनाया जा रहा है। टेक्सास के अलावा जॉर्जिया, एरिजोना, फ्लोरिडा और विस्कोंसिन राज्यों में भी मतदान करने को मुश्किल बनाने वाले बिल पारित किए जा चुके हैं। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ स्थित ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस के मुताबिक रिपब्लिकन सदस्यों ने 43 राज्यों में 253 ऐसे बिल पिछले दो महीनों में पेश किए हैं, जिनका मकसद मताधिकार को संकुचित करना है।
डेमोक्रेट सदस्यों ने ऐसे विधेयकों पर मतदान में देर करवाने की कोशिशें की हैं, लेकिन उन राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी के पास भारी बहुमत है। इसलिए डेमोक्रेटिक पार्टी की कोशिशें कामयाब नहीं हुई हैं। मतदान के लिए सख्त शर्तों से गरीब तबकों, ब्लैक समुदाय और दूसरे अल्पसंख्यकों के लिए वोट डालना मुश्किल हो जाता है। इन तबकों के लोगों के लिए पहचान पत्र बनवाना या मतदान के अधिक समय लगा पाना मुश्किल होता है। ये तबके मोटे तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी के वोटर माने जाते हैं।
कोरोना महामारी के बीच हुए पिछले चुनाव में मतदाताओं ने वोट डालने के लिए कई नए तरीके अपनाए। उन्होंने मतदान के दिन से पहले वोट डालने की दी गई सुविधा का लाभ उठाया या फिर डाक से वोट भेजे। 2020 के चुनाव में रिकॉर्ड संख्या में डाक से मतदान किया गया। ट्रंप ने खास कर डाक से मतदान पर एतराज किया था। उन्होंने कई अदालतों में इसे चुनौती दी। लेकिन उनकी तमाम याचिकाएं खारिज हो गईं।
विश्लेषकों का कहना है कि रिपब्लिकन पार्टी ने जो मुहिम छेड़ी है, उससे अमेरिका की चुनाव प्रणाली संदिग्ध और अविश्वसनीय बनेगी। ये धारणा और मजबूत होगी कि अमेरिकी चुनावों में सभी मतदाताओं के लिए वोट डालने के समान अवसर नहीं हैं।