Sri Lanka Finance Minister Ranjith Siyambalapitiya
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श्रीलंका (Sri lanka) सरकार नए साल में देश को नई दिशा देने की योजना पर विचार कर रही है। उसका मकसद उन स्थितियों से देश को निकालना होगा, जिनकी वजह से मौजूदा आर्थिक संकट में वह फंसा। श्रीलंका के वित्त राज्यमंत्री रंजीत सियमबालापिटिया ने एक इस बारे में जानकारी दी है। एक बयान में उन्होंने कहा कि 2020 में कोरोना महामारी आने के बाद लोगों से आर्थिक स्वतंत्रता छीन ली गई थी। अब इस पर विचार किया जा रहा है कि क्या मौजूदा व्यवस्था को अभी जारी रखा जाए, या लोगों को उनकी आर्थिक आजादी लौटा दी जाए।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक श्रीलंका सरकार के अंदर इस बात पर गंभीरता से विचार हो रहा है कि श्रीलंका को अब आगे आत्म-निर्भरता आधारित अर्थव्यवस्था अपनानी चाहिए, या उसे आयात पर निर्भर बने रहना चाहिए। मौद्रिक संकट खड़ा होने के बाद श्रीलंका सरकार ने 1,645 वस्तुओं के आयात पर रोक लगा दी थी। बाद में उनमें से 795 वस्तुओं के आयात की फिर से इजाजात दे दी गई। क्या बाकी बची वस्तुओं के आयात की फिर से छूट दी जाए, इस सवाल पर अभी सोच-विचार चल रहा है। देश के कारोबारी हलकों में इस प्रश्न पर मतभेद हैं।
सियमबालापिटिया ने बताया है कि उन वस्तुओं के आयात की छूट देने पर गंभीरता से विचार हो रहा है, जिनका देश के अंदर उत्पादन नहीं होता है। लेकिन जिन वस्तुओं का देश के अंदर उत्पादन हो सकता है, उनके बारे में अभी गहन चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा- ‘क्या नारियल और बांस से बनने वाले उत्पादों का भी आयात किया जाए, यह बड़ा सवाल है। इन चीजों का उत्पादन देश के अंदर भी किया जा सकता है।’
वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका में जैसे-जैसे विदेशी मुद्रा का संकट गहराया, लोगों की आयात-निर्यात करने की आजादी पर शिकंजा कसता गया है। लेकिन आयात नियंत्रित करने का परिणाम कुछ मामलों में मुनाफाखोरी के रूप में भी सामने आया है। उधर आयात रुकने का असर कुछ ऐसी वस्तुओं के निर्यात पर भी पड़ा, जिनके उत्पादन में आयातित चीजों का इस्तेमाल होता है। इन सबके कारण देश आर्थिक दुश्चक्र में फंस गया है।
विश्लेषकों के मुताबिक श्रीलंका में पैदा हुए हालात लंबे समय से अपनाई गई गलत नीतियों का परिणाम हैं। बीते कई दशक से सरकारों ने आर्थिक ढांचे की अनदेखी की। राजनीतिक दल उग्र राष्ट्रवादी भावनाओं को बढ़ावा देकर चुनाव जीतते रहे, जबकि आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने पर उनका ध्यान नहीं रहा। पहले से ही कमजोर हो चुकी अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी आने पर गहरे संकट में फंस गई और इस वर्ष वह पूरी ढह गई।
अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि श्रीलंका सरकार अगर सचमुच अर्थव्यवस्था को नई दिशा देना चाहती है, तो उसे सिर्फ आयात और निर्यात की नीति में हेरफेर से आगे बढ़ना होगा। वेबसाइट इकोनॉमीनेक्स्ट के मुताबिक विशेषज्ञों की सलाह है कि श्रीलंका सरकार को आयात-निर्यात नीति में संतुलन इस ढंग से बनाना चाहिए कि देश धीरे-धीरे मुक्त व्यापार को अपनाए और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अपनी खास भूमिका बना सके। उसे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में अपने लिए एक खास जगह बनानी होगी, तभी वह भविष्य में इस वर्ष से जैसी मुसीबत से बच पाएगा।