Pakistan- Imran Khan and Parvez Elahi
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पाकिस्तान (Pakistan) की सियासत में फिलहाल सबका ध्यान पंजाब प्रांत पर टिका हुआ है। समझा जाता है कि वहां चल रही सियासी और संवैधानिक रस्साकशी का जो नतीजा होगा, उससे पूरे देश की राजनीति प्रभावित होगी। पंजाब की प्रांतीय असेंबली के स्पीकर सिबतै खान ने गवर्नर के निर्देश का उल्लंघन कर वहां एक बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया है।
पंजाब के गवर्नर ने मुख्यमंत्री परवेज इलाही के खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बुधवार को मतदान कराने का निर्देश दिया था। लेकिन सिबतैन खान ने इसे मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने गवर्नर के कदम को गैर-कानूनी बताया। उन्होंने दावा किया कि सदन का सत्रावसान नहीं हुआ है, इसलिए गवर्नर का नया सत्र बुला कर अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान करने का निर्देश देना असंवैधानिक है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक एलायंस (पीडीएम) ने इलाही सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। इलाही पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) के नेता हैं, जो इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थन से सरकार चला रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी सरकार वाली दो राज्यों की असेंबलियों को 23 दिसंबर को भंग कराने का एलान कर रखा है। पीडीएम की रणनीति उसके पहले इलाही सरकार को गिरा देना है।
इस वर्ष अप्रैल में इमरान खान की सरकार गिर गई थी। तब से वे तुरंत आम चुनाव कराने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। इसी मांग पर जोर डालने के लिए उन्होंने अपनी दो प्रांतीय सरकारों को गिराने और वहां की असेंबलियों को भंग कराने की रणनीति अपनाई है। दूसरी प्रांतीय सरकार खैबर पख्तूनवा प्रांत की है। इमरान खान ने मंगलवार को संविधान विशेषज्ञों के साथ बैठक की।
संविधान विशेषज्ञों के एक हिस्से की राय है कि अगर स्पीकर अपने रुख पर अड़े रहे, तो गवर्नर इलाही सरकार को बर्खास्त कर असेंबली को नया मुख्यमंत्री चुनने का निर्देश दे सकते हैं। पंजाब असेंबली में सदस्यों की कुल संख्या 371 है। फिलहाल सदन में पीटीआई के 180 और पीएमएल (क्यू) के दस सदस्य हैं। इस तरह 190 सदस्यों के साथ उनका बहुमत है। पीडीएम के कुल सदस्यों की संख्या 180 है। उनमें पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के 167, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सात, राह हक पार्टी का एक सदस्य है। इसके अलावा पांच निर्दलीय सदस्य भी इस गठबंधन के साथ है। एक सदस्य तटस्थ है।
पीडीएम की गणना यह है कि सदन भंग होने की आशंका के कारण पीएमएल (क्यू) के कुछ सदस्य पीटीआई का साथ छोड़ सकते हैं। वैसे में पंजाब की सत्ता पीटीआई के हाथ से निकल जाएगी, जबकि असेंबली भंग करने की नौबत नहीं आएगी। संघीय सरकार में गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ने मंगलवार को कहा कि स्पीकर संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गवर्नर के आदेश के मुताबिक मुख्यमंत्री को अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान का सामना करना ही होगा।
इस बीच ऐसी खबर है कि मुख्यमंत्री इलाही ने मंगलवार को पीटीआई नेताओँ के साथ बैठक की। उसमें अगले आम चुनाव और उप चुनावों के लिए सीटों के बंटवारे पर चर्चा हुई। पीटीआई नेताओं ने कहा है कि ये बैठक इस बात का सबूत है कि पीएमएल (क्यू) के साथ उनका गठबंधन अटूट बना हुआ है।