ऋण की नई किस्त जारी करवाने में लगातार हाथ लगी मायूसियों के बाद अब पाकिस्तान सरकार सीधे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के खिलाफ मोर्चा खोलती नजर आ रही है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशहाक डार ने आईएमएफ पर ‘गैर-रवायती नजरिया’ अपनाने का आरोप लगाया है।
वित्त मंत्री के बयान से संकेत मिला है कि आईएमएफ ने ऋण देने के बदले पाकिस्तान पर शर्त लगाई है कि वह लंबी दूरी तक मार करने वाली परमाणु मिसाइल परियोजना का परित्याग कर दे। डार ने कहा कि पाकिस्तान से ऐसी मांग करने का अधिकार किसी को नहीं है। इस बात को महत्त्वपूर्ण समझा गया है कि डार ने यह वक्तव्य कई देशों के राजदूतों के साथ हुई विशेष बैठक के दौरान दिया।
डार ने कहा- ‘पाकिस्तान को यह बताने का अधिकार किसी को नहीं है कि वह किस प्रकार के हथियार रखे और किस प्रकार के नहीं। हमें अपनी सुरक्षा खुद करनी है।’ पर्यवेक्षकों के मुताबिक यह पहला मौका है, जब आईएमएफ से कर्ज की लंबे समय से चल रही वार्ता के सिलसिले में पाकिस्तान की परमाणु मिसाइलों का मुद्दा सामने आया है। वैसे सरकारी अधिकारियों के मुताबिक पश्चिमी देश लंबे समय से पाकिस्तान पर लंबी दूरी तक मार करने वाली परमाणु मिसाइलों की परियोजना खत्म करने के लिए दबाव डालते रहे हैं। अब पाकिस्तान की आर्थिक मुसीबत का फायदा उठा कर आईएमएफ ने उनकी इस मांग को पूरा करने का दबाव बना दिया है।
पाकिस्तान के पास शाहीन-3 मिसाइलें हैं, दो 7,750 किलोमीटर तक परमाणु हथियार दाग सकती हैं। यानी पाकिस्तान इन मिसाइलों के जरिए भारत के हर हिस्से और पश्चिम एशिया तक के देशों को निशाना बना सकता है। डार ने कहा- ‘परमाणु मिसाइल प्रोग्राम पर पाकिस्तान में कोई समझौता करने नहीं जा रहा है।’
डार के इस बयान से कुछ देर पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से भी इस बारे में बयान जारी किया गया। उसमें कहा गया- ‘पाकिस्तान का मिसाइल कार्यक्रम एक राष्ट्रीय संपत्ति है, जिसकी पाकिस्तान सरकार सुरक्षा करेगी।’ इस बयान में दावा किया गया कि पाकिस्तान का मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह सुरक्षित और दोषमुक्त है।
अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर कुछ रिपोर्टें अखबारों में छपी थीं। उसके बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा रही है। पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक रफायल मारिआनो ग्रोसी पाकिस्तान की यात्रा पर आए थे। उसके बाद ऐसी चर्चाएं और जोर पकड़ गईं कि पाकिस्तान पर परमाणु मिसाइल प्रोग्राम खत्म करने का दबाव डाला जा रहा है।
इस बीच आईएमएफ से निराशा हाथ लगने के बाद पाकिस्तान ने फिर से चीन की मिजाजपुर्सी शुरू कर दी है। पाकिस्तान के विदेश सचिव इस समय चीन गए हुए हैं, जबकि संभावना है कि पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर अगले हफ्ते बीजिंग जाएंगे। चीन के लिए रवाना होने से पहले विदेश सचिव ने वित्त मंत्री डार से उनके कार्यालय जाकर लंबी बातचीत की। चीन ने हाल में पाकिस्तान को दो बिलियन डॉलर की सहायता देने का एलान किया था, जिसमें 1.2 बिलियन डॉलर का वह भुगतान कर चुका है।