पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से 2015 में हुआ परमाणु समझौता खत्म करने व अन्य साझेदार देशों से भी शिया बहुल देश को अलग-थलग करने की रणनीति बनाई।वहीं बाइडन प्रशासन इसे लेकर उलट रुख अपना रहा है। बाइडन प्रशासन ने कहा कि वह ईरान और विश्व शक्तियों से वार्ता करने के लिए तैयार है, ताकि बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई एटमी संधि पर वापसी को लेकर चर्चा हो सके।
पुरानी नीतियों को बहाल करने के लिए अमेरिका ने यूएन में उठाए कदम
बाइडन प्रशासन के इस फैसले को ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी के इस्लामी गणतंत्र को इस डील से बाहर रखने के लिए पूरा दबाव बनाया था। प्रशासन ने 2018 में ट्रंप द्वारा खत्म की गई पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीतियों को फिर से बहाल करने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र में दो कदम उठाए।
पहला- बाइडन प्रशासन ने ट्रंप का वह फैसला पलट दिया जिसमें ईरान के खिलाफ सभी संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध बहाल किए गए और दूसरा संयुक्त राष्ट्र में तैनात ईरानी राजनयिकों की घरेलू यात्रा पर सख्त प्रतिबंध खत्म किए गए।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन और उनके ब्रिटिश व फ्रांसीसी विदेश मंत्रियों के बीच हुई चर्चा के बाद इस कदम की घोषणा की। इससे राष्ट्रपति बाइडन के विश्व नेताओं के साथ अपने पहले प्रमुख वैश्विक कार्यक्रमों में भाग लेने की तैयारी भी हुई।
इस्राइल, खाड़ी देशों में बढ़ेगी चिंता
विश्लेषकों का मानना है कि बाइडन प्रशासन का यह फैसला इस्राइल और खाड़ी देशों में चिंता बढ़ाएगा। दरअसल पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने इस्राइल के पक्ष में ईरान से समझौता खत्म किया था जबकि अब यदि ईरान इसमें वापस लौटता है तो इस्राइल को परेशानी होगी। दूसरी तरफ सुन्नी बहुल आबादी वाले खाड़ी देशों में भी इसे लेकर चिंता होगी। बता दें कि इस संधि में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, रूस और चीन शामिल हैं।
पहले ईरान संधि को पूरी तरह माने
2015 में हुए ऐतिहासिक परमाणु समझौते के तहत ईरान ने 2025 तक अपने एटमी कार्यक्रम को बहुत अधिक सीमित करने पर सहमति जताई थी। लेकिन ट्रंप ने इसे ईरान के लिए परमाणु हथियारों का रास्ता साफ होने की बात कहते हुए 2018 में इस संधि से अमेरिका को अलग कर लिया। जबकि बाइडन और उनके सलाहकार मानते हैं कि वे इस समझौते में फिर शामिल हो सकते हैं बशर्ते ईरान संधि को पूरी तरह माने।
पेरिस समझौते पर अमेरिका आधिकारिक रूप से लौटा
अमेरिका 107 दिनों के बाद पेरिस जलवायु समझौते पर आधिकारिक रूप से वापस लौट आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की इस आधिकारिक घोषणा के साथ ही पूर्व राष्ट्रपति के एक और कार्यकारी आदेश को दरकिनार किया गया। शुक्रवार को उसके समझौते पर लौटने को प्रतीकात्मक माना गया है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरस ने इस घोषणा का स्वागत किया है।
वैश्विक नेताओं का मानना है कि अमेरिका के चार साल तक अनुपस्थित रहने का समय बहुत ज्यादा है और अब उसे इस समझौते के प्रति अपनी गंभीरता को साबित करना होगा। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते से हटने की घोषणा 2019 में की थी, लेकिन यह अमेरिका में चुनाव के एक दिन बाद 4 नवंबर 2020 से प्रभावी हुआ था।