हाल में सरकार और ऐस्टैबलिशमेंट (सेना+खुफिया नेतृत्व) की तरफ से हुए भारी दमन और उसकी वजह से अपनी पार्टी में बिखराव के बावजूद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने सियासी मैदान में डटे रहने का इरादा जताया है। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के ज्यादातर प्रमुख नेता अलग हो चुके हैं। चर्चा है कि नौ मई को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद देश में हुई हिंसा को आयोजित करने के आरोप में पीटीआई को प्रतिबंधित किया जा सकता है। इस आशंका के मद्देनजर अब इमरान खान ने एलान किया है कि अगर ऐसा हुआ, तो वे नई पार्टी बना कर अगले आम चुनाव में उतरेंगे।
पाकिस्तान में आम चुनाव का माहौल अब गरमाने लगी है। यह आधिकारिक रूप से बताया गया है कि वर्तमान संसद का कार्यकाल 14 अगस्त को खत्म हो जाएगा। उसके बाद पाकिस्तान की परंपरा के मुताबिक देश की सत्ता गैर-राजनीतिक व्यक्तियों की कार्यवाहक सरकार संभाल लेगी। इसी सरकार की देखरेख में चुनाव होंगे। मतदान संभवतः अक्टूबर में होगी।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के यह एलान करने के बाद कि अगले महीने वे सत्ता कार्यवाहक सरकार को सौंप देंगे, राजनीतिक दलों का पूरा ध्यान अपनी चुनावी तैयारियों पर टिक गया है। लेकिन पीटीआई का भविष्य अभी भी अधर में है। यह चर्चा भी है कि इमरान खान को फिर गिरफ्तार किया जा सकता है और उन्हें अगला चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किया जा सकता है। खान ने खुद अंदेशा जताया है कि अगले हफ्ते उनकी गिरफ्तारी हो सकती है।
इस बीच खान ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम को एक लंबा इंटरव्यू दिया है। इसमें उन्होंने कहा- ‘अगर वे मेरी पार्टी को मुकाबले से हटा देते हैं, तो हम नए नाम से नई पार्टी बनाएंगे और फिर भी चुनाव जीतेंगे।’ पाकिस्तान के राजनीतिक पर्यवेक्षकों की राय है कि पीटीआई की लोकप्रियता इमरान खान की वजह से रही है। खान के वफादार कार्यकर्ता अभी भी उनसे जुड़े हुए हैँ। इसलिए अगर उन्हें नई पार्टी के साथ भी मैदान में उतरने दिया जाता है, तब भी एक मजबूत चुनौती पेश करेंगे।
इमरान खान पर डेढ़ सौ से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैँ। इनमें आतंकवाद के आरोप में दायर हुआ मुकदमा भी शामिल है। इमरान ने कहा- ‘अगर वे मुझे चुनाव नहीं लड़ने देते हैं, तब भी मेरी पार्टी चुनाव जीतेगी।’ उन्होंने दावा किया कि उनका समर्थन आधार जस का तस बना हुआ है। इसका कारण यह है कि पाकिस्तान की सियासत अब बुनियादी रूप से बदल चुकी है।
खान ने कहा- ‘यह 1980 या 1990 के दशकों के राजनीति नहीं है, जब शक्तिशाली राजनेता और ऐस्टबलिशमेंट यह तय करते थे कि कौन पार्टी चुनाव जीतेगी। अब लोग विचारधारा के आधार पर वोट डालेंगे। ऐसा 1970 के बाद पहली बार होगा।’
पाकिस्तान सरकार इमरान खान और उनके समर्थक नेताओं पर सैनिक अदालत में मुकदमा चलाने पर विचार कर रही है। गृह मंत्री राना सनाउल्लाह यह कह चुके हैं कि नौ मई को हुई घटनाओं की योजना इमरान खान ने निजी रूप से बनाई थी, इसलिए उन पर मिलिटरी कोर्ट में मुकदमा चलेगा।