पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। चाहे कोरोना को लेकर ढिलाई बरतने का मामला हो, चीन से नजदीकी बढ़ाने की बात हो, बार बार विश्व समुदाय के सामने कश्मीर का मुद्दा उठाना हो या फिर आतंकी फंडिंग रोकने की कोशिशों में नाकाम होने का सवाल, इमरान खान हर तरफ से विपक्ष के साथ साथ दुनिया के तमाम देशों के निशाने पर हैं।
पाकिस्तान की मुख्य विपक्षी पार्टी पीएमएल-एन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शाहिद खाकान अब्बासी ने जांच कमीशन के सामने अपना बयान दर्ज कराने के दौरान यह बात जोर देकर कही कि इस जांच में प्रधानमंत्री इमरान खान और वित्त मंत्री असद उमर को भी शामिल किया जाना चाहिए।
उनका कहना था कि जांच समिति की रिपोर्ट का तबतक कोई मतलब नहीं रह जाएगा जबतक प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की भूमिका की जांच नहीं होती और उनसे पूछताछ नहीं की जाती। ये इसलिए भी सबसे ज्यादा जरूरी है क्योंकि इकॉनामिक कोऑर्डिनेशन कमेटी के तत्काली चेयरमैन असद उमर और इमरान खान ने ये जानते हुए भी कि देश में चीनी का स्टॉक उतना नहीं है, इसके निर्यात की इजाजत कैसे दे दी।
अब्बासी ने कहा कि इससे साफ है कि या तो प्रधानमंत्री बेईमान हैं, या नाकाबिल हैं या फिर वो दोनों हैं। इसकी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि यह आपसी मतभेद या राजनीतिक विद्वेष का मामला नहीं है, यह सीधा सीधा कैबिनेट से जुड़े लोगों पर सवाल उठाने वाला है जिन्होंने इस फैसले से 16 महीनों तक अरबों रुपये कमाए और आम जनता इतनी महंगी चीनी खरीदने को मजबूर हुई।
जांच समिति को अपनी रिपोर्ट 25 अप्रैल को सौंपनी थी, लेकिन लॉकडाउन और कोरोना संकट के बीच 28 अप्रैल को हुई कैबिनेट की बैठक में कमेटी को जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन हफ्ते का वक्त और दे दिया गया है।