फारूक ने तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री खान की अपील पर सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी क्योंकि प्रतिद्वंद्वी वकील बीमारी के कारण अदालत में पेश नहीं हो सके। हालांकि, एक अज्ञात खराबी के कारण लिफ्ट फंस गई, जिससे इसके अंदर मौजूद सभी 17 लोगों की जान को खतरा पैदा हो गया।
एक वीडियो क्लिप में खोसा की सहायक वकील सुजैन जहां को यह कहते हुए देखा जा सकता है कि 10 मिनट से अधिक समय हो गया है। लिफ्ट खराब हो गई है, और प्रशासन की ओर से कोई नहीं आ रहा है। खोसा साहब और उनके वकील सभी (लिफ्ट) के अंदर हैं, मैंने प्रशासन को दस बार सूचित किया है। यहां हर कोई इस बारे में जानता है लेकिन कोई भी कार्रवाई नहीं कर रहा है, और मेरे बॉस अंदर हैं।
उन्होंने कहा, क्या इसका मतलब यह है कि अब आप वकीलों का दम घोंटकर उन्हें भी मार देंगे? आपने पहले ही (इमरान) खान को सलाखों के पीछे डाल दिया है, और अब आप वकीलों को भी मार देंगे? इस्लामाबाद की एक सत्र अदालत ने पांच अगस्त को पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) द्वारा दायर मामले में खान (70 वर्षीय) को दोषी ठहराया था और उन्हें तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। फैसले का मतलब था कि उन्हें पांच साल के लिए आम चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
घटना के अन्य वीडियो क्लिप में वकीलों को लिफ्ट का बटन दबाते हुए देखा गया, लेकिन उन्हं कोई सफलता नहीं मिली, जबकि घटनास्थल पर इकट्ठा हुए लोगों ने मदद के लिए आवाज लगाई। एक व्यक्ति को लिफ्ट की ओर एयरफ्लो बढ़ाने के लिए बिजली का पंखा पकड़े हुए भी देखा जा सकता है। आखिरकार यह घटना तब समाप्त हुई जब बचाव दल लिफ्ट के दरवाजे खोलने में कामयाब रहा और पसीने से तर-बतर खोसा व अन्य लोगों सुरक्षित बाहर निकाला गया।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' अखबार के मुताबिक, आईएचसी को अपनी नई इमारत में आए केवल तीन महीने हुए हैं। वकील पीटीआई के वकील के आसपास जमा हो गए और सरकार के खिलाफ और वकीलों के पक्ष में नारे लगाते हुए उन्हें आईएचसी परिसर से दूर ले गए। बाद में इस्लामाबाद के उपायुक्त इरफान नवाज मेमन ने मीडिया को बताया कि लिफ्ट में क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने के कारण यह हादसा होने की संभावना है।
इससे पहले खोसा ने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ खान की अपील पर सुनवाई करने का दबाव बनाया लेकिन दो न्यायाधीशों के पैनल ने इससे इनकार कर दिया और सुनवाई स्थगित कर दी। सत्तारूढ़ पार्टी के सांसदों ने 2022 में ईसीपी में तोशाखाना मामला दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि खान ने राज्य के उपहारों की बिक्री से प्राप्त आय को छिपाया है।