पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ
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2019 में नवाज शरीफ के साथ क्या हुआ था?
नवाज शरीफ उस समय भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल की सजा काट रहे थे। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया और मेडिकल आधार पर राहत का रास्ता खुला। फरवरी 2019 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने मेडिकल आधार पर उनकी जमानत याचिका खारिज की थी, लेकिन बाद के महीनों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर मामला फिर गंभीर हुआ। अक्तूबर-नवंबर 2019 में उन्हें मेडिकल आधार पर जमानत मिली और इलाज के लिए विदेश जाने का रास्ता तैयार हुआ।
नवंबर 2019 में पाकिस्तान सरकार ने नवाज शरीफ को इलाज के लिए चार सप्ताह के लिए विदेश जाने की एक बार की अनुमति दी थी। सरकार ने इसके लिए एक क्षतिपूर्ति बांड की शर्त भी रखी थी। बाद में लाहौर हाईकोर्ट के आदेश के बाद विदेश जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और नवाज शरीफ लंदन चले गए। उनके साथ उस समय उनके भाई शहबाज शरीफ भी थे।
यानी 2019 का घटनाक्रम सीधे तौर पर जेल से शुरू होकर मेडिकल जांच, अदालत की राहत और फिर विदेश में इलाज तक पहुंचा था। आज इमरान खान के मामले में भी जेल से अस्पताल और फिर संभावित विदेश इलाज की बात सामने आई है। यही समानता दोनों मामलों को एक साथ देखने की वजह बन रही है।
क्या सरकार सच में इमरान को विदेश भेज सकती है?
यही इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है। 20 अगस्त को पाकिस्तान सरकार ने संकेत दिया कि अगर इमरान खान के इलाज के लिए जरूरत पड़ी तो उन्हें विदेश भेजने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने साफ किया कि इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। यानी अभी ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है कि इमरान खान को लंदन या किसी दूसरे देश भेजा जा रहा है।
सरकार की बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जेल में बंद किसी बड़े राजनीतिक नेता को विदेश इलाज के लिए भेजना केवल मेडिकल फैसला नहीं रहता। इसमें अदालत, जेल प्रशासन, सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी जुड़ जाती है। नवाज शरीफ के मामले में भी विदेश जाने के लिए अदालत और सरकार के स्तर पर कई कानूनी कदम उठे थे। उनके लिए पहले मेडिकल आधार पर राहत मिली और फिर विदेश जाने की अनुमति की प्रक्रिया पूरी हुई थी।
इसलिए इमरान के मामले में अभी सबसे सही बात यही है कि विदेश इलाज का विकल्प खुला बताया गया है, लेकिन उसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अगर आगे अदालत या सरकार की ओर से औपचारिक अनुमति मिलती है, तभी इसे नवाज शरीफ वाले घटनाक्रम की अगली कड़ी माना जा सकेगा।
क्या इमरान और नवाज के मामलों में सचमुच समानता है?
- दोनों मामलों में पहली बड़ी समानता यह है कि दोनों पूर्व प्रधानमंत्री जेल में थे और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल उठे। दोनों मामलों में मेडिकल जांच और अदालत की भूमिका सामने आई। दोनों मामलों में विदेश में इलाज की संभावना भी चर्चा में आई। लेकिन दोनों की कानूनी स्थिति बिल्कुल समान नहीं है। नवाज शरीफ को 2019 में विदेश जाने की अनुमति एक तय प्रक्रिया के तहत मिली थी, जबकि इमरान खान के मामले में अभी सरकार ने केवल जरूरत पड़ने पर विदेश इलाज की संभावना जताई है।
- दूसरी बड़ी बात यह है कि इमरान के खिलाफ इस समय भी कई कानूनी मामले और अपीलें चल रही हैं। एक मामले में वह 14 साल की सजा काट रहे हैं, जबकि कई अन्य मामलों में सजा निलंबित या फैसले पलटे जा चुके हैं। ऐसे में विदेश जाना केवल स्वास्थ्य का मामला नहीं होगा। यह कानूनी अनुमति और उनकी हिरासत की स्थिति से भी जुड़ा होगा।
- यही कारण है कि इमरान खान के समर्थक इसे राहत की शुरुआत के रूप में देख सकते हैं, लेकिन अभी इसे जेल से स्थायी बाहर निकलने का संकेत मानना ठीक नहीं होगा। अस्पताल जाना और विदेश में इलाज की अनुमति मिलना दो अलग-अलग बातें हैं।
इमरान खान जेल क्यों गए?
इमरान खान अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रधानमंत्री पद से हटे थे। इसके बाद उनके खिलाफ कानूनी मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी। 2023 में तोशाखाना मामले में उन्हें सजा हुई और गिरफ्तारी के बाद उनकी जेल यात्रा शुरू हुई। बाद में राज्य के गोपनीय दस्तावेज से जुड़े साइफर मामले, तोशाखाना, विवाह से जुड़े मामले और अल-कादिर ट्रस्ट मामले में भी उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
अल-कादिर ट्रस्ट मामले में 2025 में उन्हें और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को 14-14 साल की सजा सुनाई गई। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि जमीन से जुड़े लाभ के बदले सरकारी धन की वापसी के मामले में भ्रष्टाचार हुआ। इमरान खान ने आरोपों से इनकार किया है और उनकी पार्टी लगातार कहती रही है कि उनके खिलाफ मामले राजनीतिक उद्देश्य से चलाए गए हैं।
इमरान की जेल में बने रहने की वजह यह भी है कि किसी एक मामले में राहत मिलने के बाद दूसरे मामले में कानूनी कार्रवाई सामने आती रही। यही पाकिस्तान की मौजूदा राजनीति की सबसे बड़ी जटिलता है। किसी नेता को एक मामले में जमानत मिल जाने का मतलब यह जरूरी नहीं कि वह तुरंत जेल से बाहर आ जाए।
पाकिस्तान में प्रधानमंत्री जेल जाने का इतिहास कितना पुराना है?
इमरान खान पाकिस्तान के पहले पूर्व प्रधानमंत्री नहीं हैं जिन्हें जेल या हिरासत का सामना करना पड़ा। देश के राजनीतिक इतिहास में कई बड़े प्रधानमंत्रियों और पूर्व प्रधानमंत्रियों के साथ ऐसा हुआ है। पाकिस्तान सरकार की आधिकारिक सूची में प्रधानमंत्रियों का लंबा इतिहास दर्ज है, जबकि अलग-अलग ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि कई पूर्व प्रधानमंत्रियों को गिरफ्तार या नजरबंद किया गया।
हुसैन शहीद सुहरावर्दी को 1962 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जुल्फिकार अली भुट्टो को 1977 में गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें फांसी दे दी गई। बेनजीर भुट्टो को भी अलग-अलग दौर में नजरबंदी और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा। नवाज शरीफ कई बार सत्ता में आए और उन्हें भी गिरफ्तारी, जेल और निर्वासन का सामना करना पड़ा।
| क्रम |
प्रधानमंत्री |
जेल/हिरासत का मामला |
वर्ष |
स्थिति |
| 1 |
हुसैन शहीद सुहरावर्दी |
सरकार विरोधी गतिविधियों के आरोप में बिना मुकदमे हिरासत |
1962 |
कराची सेंट्रल जेल में एकांत कारावास |
| 2 |
जुल्फिकार अली भुट्टो |
राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या की साजिश के आरोप में गिरफ्तारी |
1977 |
मौत की सजा, 1979 में फांसी |
| 3 |
बेनजीर भुट्टो |
सैन्य शासन के दौरान गिरफ्तारी और नजरबंदी |
1985-2007 |
अलग-अलग मौकों पर हिरासत और हाउस अरेस्ट |
| 4 |
नवाज शरीफ |
भ्रष्टाचार मामलों में गिरफ्तारी और जेल |
2018 |
सजा के बाद जेल गए, 2019 में इलाज के लिए विदेश गए |
| 5 |
शाहिद खाकान अब्बासी |
एलएनजी ठेका मामले में कथित भ्रष्टाचार |
2019 |
गिरफ्तार हुए, फरवरी 2020 में जमानत पर रिहा |
| 6 |
इमरान खान |
भ्रष्टाचार समेत कई मामलों में गिरफ्तारी और सजा |
2023 से |
अल-कादिर ट्रस्ट मामले में 14 साल की सजा |
इस इतिहास को देखते हुए इमरान खान की जेल कोई अलग घटना नहीं है। फर्क यह है कि हर दौर में कारण, राजनीतिक परिस्थितियां और सेना के साथ संबंध अलग रहे हैं।
नवाज शरीफ का मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?
नवाज शरीफ का 2019 वाला मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि उसमें स्वास्थ्य ने एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का रास्ता खोला था। वह भ्रष्टाचार के मामले में सजा काट रहे थे। उनकी तबीयत खराब हुई, मेडिकल आधार पर राहत मिली और अंततः उन्हें विदेश में इलाज की अनुमति दी गई। सरकार ने शुरू में शर्तें रखीं, फिर अदालत के हस्तक्षेप के बाद विदेश जाने का रास्ता साफ हुआ।
इसके बाद नवाज शरीफ लंबे समय तक लंदन में रहे। यानी मेडिकल राहत का मामला आगे चलकर पाकिस्तान की राजनीति का बड़ा विषय बन गया। इसी वजह से आज जब इमरान खान के लिए अस्पताल और संभावित विदेश इलाज की बात हो रही है तो 2019 की मिसाल सामने आना स्वाभाविक है।
पाकिस्तान में ऐसा बार-बार क्यों होता है?
- पाकिस्तान की राजनीति में लंबे समय से निर्वाचित सरकारों, सेना, न्यायपालिका और राजनीतिक दलों के बीच शक्ति का संघर्ष रहा है। देश में कई बार सैन्य शासन आया और कई निर्वाचित सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं। इसी राजनीतिक इतिहास ने पूर्व प्रधानमंत्रियों की गिरफ्तारी और सत्ता से बाहर होने के बाद कानूनी कार्रवाई की परंपरा को मजबूत किया।
- जब किसी बड़े राजनीतिक नेता पर मुकदमे चलते हैं तो मामला केवल अदालत तक सीमित नहीं रहता। उसके समर्थक इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हैं, जबकि सरकार और जांच एजेंसियां इसे कानूनी प्रक्रिया बताती हैं। यही अंतर पाकिस्तान में हर बड़े राजनीतिक मुकदमे को राजनीतिक संकट में बदल देता है।
- इमरान खान के मामले में भी यही दिखाई देता है। उनकी पार्टी कानूनी मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताती है, जबकि सरकार अदालतों में चल रहे मामलों को कानून के तहत होने वाली कार्रवाई बताती है। इसलिए उनकी स्वास्थ्य स्थिति का मामला भी सामान्य मेडिकल मुद्दे से आगे निकलकर राजनीतिक बहस बन गया है।
पाकिस्तान में पीएम के जेल जाने का रहा है इतिहास
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