तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से चल रही पाकिस्तान सरकार की वार्ता से देश में नाराजगी बढ़ रही है। लेकिन इसकी अनदेखी करते हुए इमरान खान सरकार ने इस संगठन के 100 और दहशतगर्दों को रिहा कर दिया है। टीटीपी तालिबान की पाकिस्तान में सक्रिय शाखा है, जिसे बोलचाल में पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है। पाकिस्तानी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक पाकिस्तान सरकार और टीटीपी के बीच बनी सहमति के तहत 100 दहशतगर्दों को रिहा किया गया है।
रिहाई से जनता नाखुश
पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक सरकारी सूत्रों के साथ-साथ टीटीपी से जुड़े सूत्रों ने भी इस रिहाई की पुष्टि की है। जबकि इसी अखबार की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि टीटीपी के साथ बातचीत और उसके दहशतगर्दों की रिहाई की खबरों से पाकिस्तान के भीतर जनमत का एक बड़ा हिस्सा गुस्से में है। टीटीपी पर स्कूलों, होटलों, चर्च और बाजारों में खूंखार हमलों के आरोप हैं। बताया जाता है कि उसके हमलों में 70 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
विश्लेषकों के मुताबिक ऐसा माना जाता है कि टीटीपी के ज्यादातर लड़ाके अफगानिस्तान में हैं। वे वहां उन इलाकों में रह रहे हैं, जिनकी सीमाएं पाकिस्तान से लगती हैं। 2014 में टीटीपी के खिलाफ पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार ने जोरदार सैनिक अभियान चलाया था। उस समय बड़ी संख्या में टीटीपी लड़ाके भाग कर अफगानिस्तान चले गए। तब से उन्होंने वहीं अपना अड्डा बना रखा है।
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि 2014 की सैनिक कार्रवाई से पाकिस्तान में टीटीपी की कमर टूट गई थी। उसके पहले वह सैकड़ों फिदायीन हमले और बम विस्फोट कर चुका था। इसके अलावा पूरे देश में उस अनगिनत लोगों के अपहरण करने के भी आरोप हैं। इसलिए इस आतंकवादी संगठन को लेकर पाकिस्तान में गहरा विरोध भाव है। इसीलिए पिछले महीने जब ये खबर आई कि इमरान खान सरकार टीटीपी के साथ बातचीत कर रही है, तो बड़ी संख्या में उससे सकते में रह गए।
सरकार बोली- रिहा तालिबानी निचले दर्जे के कार्यकर्ता
पाकिस्तान सरकार और टीटीपी के बीच पिछले 9 नवंबर के बीच एक दूसरे पर हमले रोकने का समझौता हुआ था। सरकारी सूत्रों का कहना है कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है, इसलिए युद्धविराम की अवधि 9 दिसंबर के बाद आगे बढ़ा दी गई है। इसी बीच बीते दस दिन के अंदर 100 टीटीपी लड़ाकों को जेलों से रिहा किया गया है। लेकिन सरकार का दावा है कि उनमें कोई बड़ा दहशतगर्द नहीं है। एक सरकारी अधिकारी ने अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहा- रिहा किए गए तालिबानी निचले दर्जे के कार्यकर्ता हैं। उन पर सरकार की निगरानी जारी है।
एक सुरक्षा अधिकारी ने इस अखबार को बताया कि ये रिहाई खैबर पख्तूनवा प्रांत में हुई हैं। अधिकारी ने कहा कि रिहा हुए तालिबानियों को अफगानिस्तान नहीं जाने दिया जाएगा। सरकार ने इसे बातचीत की कामयाबी माना है कि टीटीपी युद्धविराम को 9 दिसंबर के बाद आगे जारी रखने पर सहमत हो गया। अब इसे अनिश्चित काल तक के लिए बढ़ा दिया गया है। ये खबर पहले ही आ चुकी है कि बातचीत शुरू कराने के लिए मध्यस्थता अफगानी तालिबान के नेताओं की थी।