पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के मुखिया और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर उनकी पार्टी के नेता बड़ा दावा किया है। पीटीआई नेता जुनैद अकबर ने कहा कि- इमरान खान सरकार से बातचीत करने के लिए सहमत हैं, लेकिन उन्हें बंदूक के दम पर मजबूर नहीं किया जा सकता है।
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पाकिस्तान सरकार या किसी भी संस्था के साथ सुलह वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें बंदूक के दम पर मजबूर नहीं किया जा सकता हैं। यह दावा इमरान खान की पार्टी पीटीआई के एक वरिष्ठ नेता ने किया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की इकाई के अध्यक्ष जुनैद अकबर की यह टिप्पणी गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान आई। इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं और अप्रैल 2022 में उनकी सरकार गिराए जाने के बाद उन पर कई मामले दर्ज किए गए हैं।
संविधान और कानून के लिए किसी से भी करेंगे बातचीत
उन्होंने कहा कि इमरान खान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह संविधान और कानून की सर्वोच्चता के लिए किसी से भी बात करने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें बंदूक की नोक पर मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, 'हमारे दरवाजे खुले हैं, लेकिन अगर कोई सोचता है कि इमरान खान साहब और हमारे कार्यकर्ताओं को जेल में रखकर और हमारे खिलाफ एफआईआर दर्ज करके वे अपनी इच्छा हम पर थोप सकते हैं, तो वे गलत हैं।'
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'सभी कानून की सीमा के भीतर रहकर करें काम'
जुनैद अकबर ने इस बात पर भी जोर दिया कि संस्थाओं को अपनी कानूनी रूप से परिभाषित सीमाओं के भीतर काम करना चाहिए और राजनीतिक दलों को भी ऐसा ही करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'हम संविधान और कानून को बनाए रखने के लिए तैयार हैं और सरकार या संस्थाएं किसी से भी बातचीत करने के लिए तैयार हैं।' उन्होंने कहा, 'हालांकि हमें कुछ संस्थानों के प्रमुखों से शिकायत हो सकती है, फिर भी हम इन संस्थानों का सम्मान करते हैं क्योंकि ये हमारे हैं।'
'इमरान खान के मौलिक अधिकारों को नकारा जा रहा है'
पीटीआई नेता ने कहा कि संस्थान और सत्तारूढ़ सरकार दोनों ने लगातार कोशिश की है और कुछ हद तक ऐसी परिस्थितियां बनाने में सफल भी हुए हैं जहां इमरान खान के मौलिक अधिकारों को नकारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे जेल मैनुअल की अनुमति से ज्यादा की मांग नहीं कर रहे हैं। अकबर ने कहा कि उन्होंने बार-बार इमरान खान से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें 3-4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा और बाद में मिलने से मना कर दिया गया।
इमरान खान की रिहाई के लिए विरोध प्रदर्शन
इस पर उन्होंने कहा: 'यह सिर्फ इमरान खान साहब का मुद्दा नहीं है; यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है। संस्थानों और जनता के बीच की खाई काफी बढ़ गई है...हम बार-बार जनता द्वारा समर्थित मजबूत संस्थानों की जरूरत पर जोर देते हैं।' अकबर ने चेतावनी दी कि सबसे खतरनाक स्थिति तब होगी जब जनता बिना नेतृत्व के सड़कों पर उतरेगी, तब किसी को भी विरोध करने का मौका नहीं मिलेगा।