पाकिस्तान में बढ़ रहे सियासी तापमान के बीच प्रधानमंत्री इमरान खान पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को खींच लाए हैं। उन्होंने अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की तरफ से रविवार को आयोजित विशाल रैली को संबंधित करते हुए आरोप लगाया कि स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की ही सजा भुट्टो को मिली थी। 1977 में तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल जिया उल हक ने भुट्टो का तख्ता पलट दिया था। बाद में हत्या का एक मामला चला कर भुट्टो को फांसी दे दी गई थी।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि ये बयान देकर इमरान खान ने एक तीर से दो निशाने साधने की कोशिश की है। एक तरफ इससे वे पाकिस्तान को जनता को बताना चाहते हैं कि उनके विरोधी विदेशी ताकतों के हाथ में खेल रहे हैं। दूसरे इसके जरिए उन्होंने पीपीपी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के बीच दरार डालने की कोशिश की है। जनरल जिया उल हक को एक समय नवाज शरीफ का सरपरस्त माना जाता था। जनरल जिया ने जब भुट्टो सरकार का तख्ता पलटा, तब ये इल्जाम लगा था कि उनकी पीठ पर अमेरिकी लॉबी का हाथ है।
अब पीएमएल (नवाज) और पीपीपी इमरान खान के खिलाफ लामबंदी में एक साथ हैं। पीपीपी का नेतृत्व अभी जुल्फिकार अली भुट्टो के नाती बिलावल भुट्टो के हाथ में है। इमरान खान ने कहा- ‘हम जानते हैं कि पीएमएल (नवाज) और पीपीपी को किसने एकजुट होने के लिए मजबूर किया है।’ पर्यवेक्षकों के मुताबिक इमरान खान का निशाना पश्चिमी देशों की तरफ है। इसीलिए वे बार-बार कह रहे हैं कि पाकिस्तान अब जाग चुका है और अब ‘हम किसी की गुलामी नहीं करेंगे।’
पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 95 में प्रावधान है कि अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के कम से कम तीन दिन बाद ही उस पर मतदान हो सकता है। लेकिन मतदान में सात दिन से ज्यादा की देर नहीं की जा सकती। पाकिस्तान के अखबारों में छपी रिपोर्टों के मुताबिक पीटीआई मतदान को सातवें दिन तक टालने की कोशिश करेगी। इस बीच पाला बदलने वाले पार्टी सांसदों और साथ छोड़ने वाले सहयोगी दलों को मनाने की कोशिश जारी है।
साथ ही विपक्षी खेमे में दरार डालने की रणनीति पर भी पीटीआई चल रही है। इसी कोशिश में इमरान खान ने ‘भुट्टो कार्ड’ चला है। समझा जाता है कि पाकिस्तान के पूरे इतिहास में जुल्फिकार अली भुट्टो सबसे लोकप्रिय नेता रहे हैं। अब इमरान खुद को उनकी ही श्रेणी का नेता बताने की कोशिश कर रहे हैं।