अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा समेत कई अंतरिक्ष विज्ञानी चंद्रयान-2 पर नजर रखे हुए हैं। इन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस मिशन की कामयाबी से चंद्रमा के भूगोल और उसकी बनावट और आंतरिक संरचना के बारे में उनकी समझ बढे़गी। अमेरिका में भारतीय दूतावास में चंद्रयान-2 के सीधा प्रसारण देखने की व्यवस्था की गई है।
जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में अप्लायड फिजिक्स लेबोरेटरी की अंतरिक्ष विज्ञानी ब्रेट डेनेवी ने कहा, जिस जगह चंद्रयान-2 उतरेगा, वह बेहद अलबेली जगह है। यान से सतह पर पानी की मौजूदगी और उसकी मात्रा के बारे में सूचना मिलने की उम्मीद है, जिसका पता यान में लगे व्यापक तरंगों और रोशनी वाले स्पेक्ट्रोमीटर आसानी से लगा लेंगे। चंद्रयान-2 अपने साथ 14 उपकरण लेकर गया है, जिसमें से 13 तो भारत के हैं, जबकि एक नासा का है।
वहीं, नासा में ग्रहों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिक डेव विलियम्स का कहना है कि चंद्रयान-2 से हमें उन जटिल सवालों के जवाब मिलेंगे, जो अभी तक अनसुलझे रह गए हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना में लुनार एंड प्लेनेेटरी लेबोरेटरी के निदेशक टिमोथी स्विंडल के मुताबिक, भारत के इस मिशन से वैज्ञानिकों को यह उम्मीद बढ़ी है कि चांद की उत्पत्ति के बारे में उनकी समझ और बढे़गी और साथ ही भविष्य के मिशनों के लिए पानी की तलाश भी पूरी होने की उम्मीद बढ़ गई है। हम जानते हैं कि चांद पर पानी तो है, मगर हम यह नहीं जानते कि वहां कितना पानी है और इसका पता कैसे चलेगा।