अमेरिका में व्हाइट हाऊस पर हुए हिंसक प्रदर्शन के लिए दुनिया भर में राष्ट्रपति ट्रंप और उनके समर्थकों की आलोचना हो रही है। आलोचना नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने की है। अमेरिका के निचले सदन (प्रतिनिधि सभा) की स्पीकर नैंसी पोलासी ने राष्ट्रपति ट्रंप को पद से हटाने अथवा उनके खिलाफ महाभियोग लाने की मांग तक कर दी है, लेकिन अमेरिका की व्यवस्था को समझने वालों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ यह कार्रवाई आसान नहीं है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने न केवल अमेरिका में बल्कि रिपब्लिकन पार्टी में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। दूसरे राष्ट्रपति ट्रंप को पद से हटाने के लिए उपराष्ट्रपति माइक पेंस की भी मदद चाहिए। अमेरिका में भारतीय दूतावास में रह चुके सूत्र का कहना है कि माइक पेंस ट्रंप का साथ दे रहे हैं। बोलने के लिए दोनों नेता एक दूसरे के खिलाफ चाहे जो बयान दें, लेकिन आंतरिक तौर पर उनमें मजबूत संबंध हैं। सूत्र का कहना है कि ट्रंप के कार्यकाल के केवल 12 दिन बचे हैं। इतने कम समय के लिए उपराष्ट्रपति पेंस भी ट्रंप के विरोध में महाभियोग की कार्रवाई के लिए तैयार नहीं होंगे। इसका एक बड़ा कारण रिपब्लिकन पार्टी की साख पर बट्टा लगना भी है।
बताते हैं ट्रंप भले ही अब व्हाइट हाऊस से बाहर जाने का रास्ता देख रहे हैं, लेकिन वह 2024 में वापस लौटने की गुंजाइश भी देख रहे हैं। माइक पेंस की नजर भी 2024 के चुनाव पर हो सकती है। रिपब्लिकन के बीच में मजबूत पकड़ बनाने वाले ट्रंप अगर 2024 में उम्मीदवार नहीं बनते हैं तो माइक पेंस को ट्रंप की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए माइक पेंस इस तरह की किसी भी अनुमति को देने से बचने की कोशिश करेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप के पास किसी को भी माफी देने का वीटो पावर है। यहां तक कि वह स्वयं को भी माफ कर सकते हैं। वैसे कल के अपने संबोधन में राष्ट्रपति ट्रंप ने इस तरह के हिंसक प्रदर्शन की निंदा की है। पूर्व भारतीय राजनयिक का कहना है कि व्हाइट हाऊस के पास हुए प्रदर्शन के लिए ट्रंप को कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराना आसान नहीं होगा। इस बारे में तथ्यों, प्रमाणों को एकत्र करना एक जटिल प्रक्रिया है।