कोरोना से बचाव के लिए मास्क अकेले कारगर नहीं है वायरस से खुद को बचाना है तो मास्क के साथ सुरक्षित शारीरिक दूरी के नियमों का पालन करना होगा। फिजिक्स ऑफ लोड जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, वैज्ञानिकों ने पांच अलग-अलग तरह के मास्क पर अध्ययन के बाद यह दावा किया है कि खांसने और छींकने से वायरस का प्रसार कैसे होता है। संक्रमित व्यक्ति में इससे उबरने के आठ माह तक इम्यूनिटी बनी रहती है।
दो लोगों के बीच 6 फुट की दूरी अनिवार्य
अमेरिका के न्यू मैक्सिको स्टेट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक कृष्णा कोटा बताते हैं कि मास्क पहनने से किसी व्यक्ति के खांसने, छींकने से निकलने वाले वायरस से बचाव तभी संभव है जब शारीरिक दूरी यानी 6 फुट की दूरी के नियम का पालन हो।
कम दूरी बेहद ही खतरनाक है
डॉक्टर कोटा के अनुसार, 6 फुट से कम दूरी का मतलब यह है कि बहुत कम संख्या में भी वायरस के सूक्ष्म कण संक्रमित करने के लिए पर्याप्त हैं। वह बताते हैं कि एक बार छींकने के दौरान करीब 20 करोड़ छोटे-छोटे कण निकलते हैं। छींकने वाले व्यक्ति में वायरल लोड कितना है और सामने खड़ा व्यक्ति उस से कितना दूर है इस आधार पर संक्रमण की संभावना बढ़ या घट सकती है। अगर व्यक्ति ने मास्क नहीं पहना है तो संक्रमण की संभावना अधिक है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि संक्रमित व्यक्ति के ठीक होने के बाद वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी 8 महीने तक रह सकती है। इस आधार पर वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि वैक्सीन व्यक्ति को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकती है। ऑस्ट्रेलिया के मोनाश यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का अध्ययन हाल ही साइंस इम्यूनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है। बी-कोशिका वायरस के खिलाफ मेमोरी बनाने का काम करती है।
25 मरीजों के रक्त सैंपल पर वैज्ञानिकों का अध्ययन
शरीर संक्रमण की चपेट में आता है तो ये कोशिका वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी को सक्रिय कर देती है जिससे वायरस निष्क्रिय हो जाता है। वैज्ञानिकों ने कोरोना के 25 मरीजों के रक्त के नमूने की जांच संक्रमण के चौथे दिन से लेकर 242वें दिन तक की।
सह शोधकर्ता इम्युनोलॉजी एंड पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर मेनू व्हेन जेल्म का कहना है कि शोध से यह स्पष्ट हो गया है कि वायरस के खिलाफ टीकाकरण से सुरक्षा कवच मजबूत होगा, क्योंकि शरीर पहले से ही उसके खिलाफ सुरक्षा तंत्र बना चुका है।