संयुक्त अरब अमीरात में कुछ भारतीय समूह भारत के नए मसौदा आव्रजन कानून में संशोधन को लेकर निर्धारित समय के भीतर अपना सुझाव नहीं दे पाए हैं। यूएई के इन समूहों ने अपनी समस्याओं के निबटारे के लिए मसौदा पर सुझाव देने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग की है। मालूम हो कि नया मसौदा विधेयक, 1983 के आव्रजन कानून की जगह लेगा।
भारत सरकार ने नए मसौदा कानून के लिए लोगों की प्रतिक्रिया मांगी है। इस कानून के तहत प्रवासियों का कल्याण और संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ ही विदेश जाने वालों भारतीयों के जरूरी पंजीकरण, एक आव्रजन प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना करना है। इस पर सुझाव देने की तारीख 20 जनवरी तक तय की गई थी।
इसके अंतर्गत अवैध तरीके से भर्ती, शोषण, मानव तस्करी को रोकने के लिए कड़े नियम, जुर्माने का भी प्रस्ताव है। यूएई के एक अखबार के अनुसार यूएई में भारतीय संगठनों का कहना है कि भारत सरकार को अपने प्रवासियों के बीच इस मसौदा विधेयक के बारे में अच्छे से प्रचार करना चाहिए।
हर कोई ट्विटर पर नहीं, ठीक से होना था प्रचार
इधर, केरल सोशल सेंटर के अध्यक्ष ए के बीरन कुट्टी ने कहा है कि उन्हें तीन दिन पहले मसौदा कानून का पता चला। उन्होंने कहा कि सरकार को ऑफिशियल चैनल और राजनयिक मिशनों के जरिए इसे प्रसारित करना चाहिए। विदेश मंत्रालय की ओर से मांगे गए जवाब के ट्वीट के बारे में हममें से किसी को पता नहीं है। मुझे लगता है कि सावधानी से मसौदा विधेयक का अध्ययन करने और अपनी चिंताओं से अवगत कराने का समय हमने गंवा दिया है।
भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्र (आईएससीसी) के अध्यक्ष रमेश पनिक्कर ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा कि हर कोई ट्विटर पर नहीं है। इस तरह के महत्वपूर्ण मसौदा विधेयक को ऑफिशियल चैनल के जरिए सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जतायी कि भारत सरकार मसौदा विधेयक में सुझाव की मांग को लेकर निर्धारित तारीख आगे बढ़ाएगी।