अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से पाकिस्तान को मिलने वाले राहत पैकेज में देरी हो सकती है। इस संबंध में आईएमएफ ने पाकिस्तान से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की जानकारी मांगी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आईएमएफ पाकिस्तान से सीपीईसी परियोजना का विवरण मांग रहा है और इस बात की लिखित गारंटी चाहता है कि इस्लामाबाद उसके द्वारा मिले पैसे का उपयोग चीन को कर्ज की किश्तें चुकाने में नहीं करेगा।
अंग्रेजी अखबार ‘डॉन’ ने सोमवार को सूत्रों के हवाले से कहा कि राहत पैकेज को अंतिम रूप देने के लिए इस्लामाबाद आने वाले आईएमएफ दल की योजना टल सकती है। आईएमएफ का यह दल अप्रैल के बजाय अब अगले महीने पाकिस्तान का दौरा करेगा। दोनों पक्ष अनुबंध की अंतिम शर्तों पर गहन चर्चा कर रहे हैं।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि आईएमएफ के कुछ अधिकारी जायजा लेने के लिए इस्लामाबाद का दौरा करेंगे और सभी जांच पड़ताल के बाद इस महीने के अंत तक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
बेल आउट पैकेज को लेकर पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले वित्त मंत्री उमर शुक्रवार को न्यूयॉर्क गए थे, लेकिन उनकी टीम आगे की वार्ता के लिए वाशिंगटन में रुकी रही। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि दोनों पक्ष बेल आउट पैकेज को लेकर एक समझ तक पहुंच गए हैं और एक या दो दिन में हम एक पूर्ण समझौते तक पहुंचने की उम्मीद करते हैं।
बताते चलें कि कुछ दिन पहले अमेरिका के तीन प्रभावशाली सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से आईएमएफ की ओर से पाकिस्तान को मिलने वाले प्रस्तावित बेल आउट पैकेज का विरोध करने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि इन पैसों का उपयोग पाकिस्तान चीन का कर्ज उतारने में करेगा।