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आईएमएफ-एडीबी ने चेताया: पाकिस्तान बुरी अर्थव्यवस्था, कुप्रबंधन जाल में फंसा

सार

आईएमएफ और एडीबी की दो रिपोर्ट ने दावा किया है कि पाकिस्तान बुरी अर्थव्यवस्था है। इसी के साथ यह देश कुप्रबंधन जाल में फंसा हुआ है। जिससे 
देश भारी कर्ज और कमजोर निवेश से जूझ रहा है। इतना ही नहीं 80 फीसदी आबादी पेयजल तक से वंचित है। 
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पाकिस्तान भारी कर्ज और कमजोर निवेश से जूझ रहा - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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पाकिस्तान के लिए बुधवार को आई दो रिपोर्टें बेहद चौंकाने वाली और उसकी अर्थव्यवस्था की कलई खोलने वाली हैं। पहली रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) की है जिसके नवीनतम अनुमानों से पता चलता है कि यह देश अब भी भारी कर्ज, कमजोर निवेश और धीमी रोजगार वृद्धि से जूझ रहा है। दूसरी रिपोर्ट एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की है जिसमें चेताया गया है कि पाकिस्तान कुप्रबंधन में डूबा है और जल संकट गंभीरतम हालत में है।
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आईएमएफ ने पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर की नई राशि देने के बीच चेताया कि देश की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025 में 2.6% से बढ़कर 2026 तक 3.2% हो जाएगी, जो 24 करोड़ की आबादी वृद्धि की दर से लगभग मेल नहीं खाती। मुद्रास्फीति भी घटकर 4.5% रह गई है जो अस्थिरता का संकेत देती है। उधर, एडीबी ने कहा- पाकिस्तान में 80% से अधिक आबादी स्वच्छ पेयजल से वंचित है। देश अनियंत्रित आबादी व कुप्रबंधन से भारी दबाव में है।

कमजोर रोजगार सृजन क्षमता का शिकार
आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की जनसंख्या मध्य 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2.55% है, जबकि विश्व बैंक के आंकड़े 1.8-1.9% दर्शाते हैं। बेरोजगारी दर वित्त वर्ष 2026 में मामूली रूप से 7.5% रहने का अनुमान है, जो वर्तमान विकास पथ की कमजोर रोजगार सृजन क्षमता को दर्शाता है। राजकोषीय मोर्चे पर, सरकारी राजस्व और अनुदान 2026 तक 16.3% होने का अनुमान है, जबकि व्यय जीडीपी के करीब 20% के आसपास ही रह सकेगा।
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सार्वजनिक ऋण के बोझ तले दबा है पाकिस्तान
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के मुताबिक, पाकिस्तान सार्वजनिक ऋण के बोझ तले बुरी तरह से दबा हुआ है। आईएमएफ दायित्वों सहित कुल सामान्य सरकारी ऋण जीडीपी के लगभग 72-73% तक रहने का अनुमान है, जबकि सरकारी व गारंटीकृत ऋण करीब 76% रहने की उम्मीद है। घरेलू ऋण जीडीपी का लगभग आधा हिस्सा है, जिससे घरेलू उधार दरों में वृद्धि के कारण ब्याज लागत अधिक बनी हुई है। ये हालात अर्थव्यवस्था के बेहद संकट में रहने का संकेत देते हैं।

पाकिस्तानी नीतियों पर चेतावनी
पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 1972 में 3,500 घन मीटर से गिरकर 2020 में मात्र 1,100 घन मीटर रह गई है, जिससे यह पूर्ण कमी की दहलीज के खतरनाक रूप से करीब पहुंच गया है। एडीबी ने कहा कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय जल नीति योजना और कार्यान्वयन के बीच गंभीर अंतर से ग्रस्त है। इसे लेकर एडीबी ने पाकिस्तानी नीतियों पर चेतावनी भी जारी की।

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जल प्रबंधन अक्षमता और संस्थागत विखंडन से ग्रस्त
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने अपनी नवीनतम एशियाई जल विकास आउटलुक (एडब्ल्यूडीओ) रिपोर्ट में चेतया है कि पाकिस्तान में जल संकट गंभीर बना हुआ है। इसके पीछे देश में कुप्रबंधन की सबसे बड़ी भूमिका है। इस कारण पाकिस्तान के जल संसाधन अत्यधिक दबाव में हैं। रिपोर्ट में असुरक्षित पानी और कृषि में भूजल के अत्यधिक उपयोग से होने वाली व्यापक जलजनित बीमारियों का भी जिक्र है। इसी के चलते भूजल का क्षरण व आर्सेनिक प्रदूषण हुआ है। एडीबी ने कहा, पाकिस्तानी जल प्रबंधन अभी भी अक्षमता, संस्थागत विखंडन और अपर्याप्त निधि से ग्रस्त है।
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