भारत ने क्षेत्रीय रक्षा कूटनीति, सहभागिता और मुद्दा आधारित भागीदारी पर काफी अधिक ध्यान दिया है। लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की बढ़ती रक्षा भूमिका और भागीदारी का भारत-चीन संबंधों पर भी असर दिखेगा। बता दें, आईआईएसएस रिपोर्ट सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला वार्ता की शुरुआत में जारी हुई है। यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक सुरक्षा वार्ता है।
क्षेत्रीय मनमुटाव बढ़ सकता है
भारतीय सेना तेजी से बढ़ा रही है संयुक्त सैन्य अभ्यास
रिपोर्ट के अनुसार, भारत क्षेत्रीय भागीदारों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास को न केवल सुधार के रूप में देखता है बल्कि नई दिल्ली के साथ उनके सहजता स्तर को भी बढ़ाता है। भारत सैन्य संयुक्त अभ्यास को बढ़ा रहा है, जिसमें वायुसेना, थलसेना और नौसेना अभ्यास तीनों अभ्यास शामिल है। भारतीय नौसेना के बंदरगाहों पर भी सैन्य अभ्यास आयोजित किए जाते हैं। भारतीय सेना एशिया-प्रशांत सेनाओं के साथ त्रिपक्षीय, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अभ्यासों में तेजी से भाग ले रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय सेना ने 2023 में कुल 75 संयुक्त सैन्य अभ्यास किए हैं। जिसमें 55 द्विपक्षीय, 16 बहुपक्षीय अभ्यास शामिल है। साल-दर-साल भारतीय सेना ने सैन्य अभ्यासों को बढ़ाया है। 2022 में 45 अभ्यास, 2021 में 39, 2019 में 29 और 2018 में 40 सैन्य अभ्यास आयोजित किया गया था। भारत अपनी क्षेत्रीय उपस्थिति को बढ़ाना चाहता है। इसका लक्ष्य भागीदार देशों की संख्या को बढ़ाना है।
संयुक्त अभ्यास के लिए भारतीय नौसेना भी सबसे आगे