यदि जीवनसाथी जीवन को लेकर आशावादी नजरिया रखता हो और उसके साथ संबंध अच्छे हों तो व्यक्ति को उम्र संबंधी बीमारियां होने की आशंका कम होती है। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्ययन के मुताबिक आशावादी जोड़ीदार साथी के लिए उदाहरण बनते हैं, उन्हें अल्जाइमर व डिमेंशिया जैसी बीमारियों से दूर रखते हैं।
अध्ययन के सह-लेखक व यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर विलियम चॉपिक ने बताया कि हम अपने जीवनसाथी के साथ ज्यादा समय बिताते हैं। वे हमें व्यायाम करने, स्वास्थ्यवर्धक भोजन लेने और समय पर दवा लेने जैसे कामों के लिए प्रोत्साहित करते हैं। जोड़ीदार का जीवन के प्रति पॉजिटिव रवैया होने से हमारे जीवन में भी चीजें अच्छी होने लगती हैं। आप खुद ही बीमारियों से दूर रहते हुए लंबी उम्र और बेहतर भविष्य की सोचने लगते हैं। एजेंसी
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खुद को बदल बन सकते हैं आशावादी
शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि आशावादी नजरिया रखने वाले जोड़े जब पुराने दिनों को याद करते हैं तो उन्हें अच्छी बातें ही याद आती हैं। इसके लिए उन्होंने गूगल के एक हालिया विज्ञापन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने यह भी बताया कि आशावादिता पैदा की जा सकती है, लेकिन इसके लिए बदलाव की इच्छा होना सबसे जरूरी है।
बेहतर जीवनशैली की मिलती है प्रेरणा
आशावादी जोड़ीदार हमें बेहतर जीवनशैली के लिए प्रेरित करते हैं। उदाहरण के लिए यदि जोड़ीदार धूम्रपान छोड़ दे या रोज जिम जाने लगे तो कुछ सप्ताह के बाद दूसरा साथी भी ऐसा करने लगता है। चॉपिक बताते हैं कि अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के जिम्मेदार कारकों में जीवनशैली सबसे महत्वपूर्ण है। जिनके जीवनसाथी आशावादी प्रवृत्ति के हैं, वे आम तौर पर इन सभी पैमानों पर दूसरों के मुकाबले बेहतर होते हैं।
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4500 जोड़ियों का 8 साल तक अध्ययन
जर्नल ऑफ पर्सनैलिटी में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने करीब 4500 जोड़ियों का 8 वर्ष तक विश्लेषण किया। पता चला कि जिनकी शादी आशावादी जोड़ीदार से हुई, वे उम्र आधारित शारीरिक दुर्बलताओं से बच जाते हैं। पहले के शोधों में जोड़ीदार की अच्छी आदतों से ईर्ष्या या किसी के द्वारा नियंत्रित किए जाने की कोशिश पर गुस्सा जैसी बातों के बारे में बताया गया है। नया अध्ययन दोनों के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है।