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‘यीशु से मिलना है तो भूखे रहो’: केन्या में 191 लोगों की मौत का मामला, जानिए कौन है पादरी पॉल मैकेंजी?

Wed, 21 Oct 2026 08:34 PM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

केन्या के पादरी पॉल मैकेंजी पर अपने अनुयायियों को स्वर्ग और यीशु से मिलने के नाम पर भूखा रहने के लिए मजबूर करने का आरोप साबित हुआ है। शाकाहोला जंगल में 400 से ज्यादा लोगों के शव मिले थे, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की थी।
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पादरी पॉल मैकेंजी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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केन्या में सैकड़ों लोगों की मौत से जुड़े मामले में पादरी पॉल मैकेंजी का नाम सामने आया है। मैकेंजी पर आरोप है कि उसने अपने अनुयायियों को विश्वास दिलाया कि भूखे रहने और जान देने से वे स्वर्ग पहुंचकर यीशु से मिल सकेंगे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सोमवार को अदालत ने मैकेंजी को 190 बच्चों और एक वयस्क की हत्या के मामले में दोषी ठहराया। उसके साथ 28 अन्य लोगों को भी दोषी करार दिया गया है। 

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टैक्सी ड्राइवर से बना पादरी
जानकारी के मुताबिक, पॉल मैकेंजी पहले टैक्सी चलाता था और सड़क किनारे सामान बेचता था, लेकिन बाद में धर्म का प्रचार करने लगा। साल 2003 में उसने केन्या के तटीय शहर मालिंदी में गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च की स्थापना की। धीरे-धीरे उसके अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी। चर्च की कई शाखाएं खुलीं और हजारों लोग उससे जुड़ गए। मैकेंजी के उपदेश एक टीवी चैनल के जरिए भी लोगों तक पहुंचते थे।  

लोगों को दुनिया खत्म होने का डर दिखाता था
मैकेंजी की शिक्षाओं में दुनिया के अंत और प्रलय जैसी बातों पर खास जोर दिया जाता था। वह कथित तौर पर अनुयायियों को समझाता था कि सांसारिक जीवन से दूर होकर धार्मिक आदेशों का पालन करना ही मुक्ति का रास्ता है। अदालत में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, वह लोगों को भरोसा दिलाता था कि उसका ईश्वर से सीधा संपर्क है। उसकी बातों पर विश्वास करके कुछ अनुयायियों ने अपनी संपत्ति तक बेच दी और चर्च को दान दे दिया। इस तरह कई लोग धीरे-धीरे उसके प्रभाव में आते चले गए और उसकी बातों को मानने लगे।
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लोगों को डॉक्टरों के पास जाने से रोकता था मैकेंजी

मैकेंजी पर आरोप है कि वह अनुयायियों को बच्चों की पढ़ाई और चिकित्सा सुविधाओं से दूर रहने के लिए कहता था। अदालत में बताया गया कि इलाज को शैतान से जुड़ी चीज बताकर लोगों को डॉक्टरों के पास जाने से रोका जाता था। उसकी शिक्षाओं का असर बच्चों पर भी पड़ा। परिवारों को सामान्य जीवन से दूर करके ऐसी व्यवस्था में रखा गया, जहां धार्मिक आदेशों का पालन जरूरी माना जाता था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि इस व्यवस्था में लोगों को भूखा रहने के लिए मजबूर किया गया और बच्चों को खास तौर पर निशाना बनाया गया।

बच्चों को भूखा रखा, भागने पर होती थी पिटाई
आरोपों के मुताबिक, अनुयायियों को भूखा रखने का सिलसिला सबसे पहले बच्चों से शुरू किया गया था। उन्हें खाना नहीं दिया जाता था, क्योंकि बताया जाता था कि ऐसा करने से वे यीशु से मिल सकेंगे। बच्चे अगर भागने या खाना खाने की कोशिश करते, तो उन्हें रोकने के लिए गार्ड तैनात रहते थे। नियम तोड़ने वाले बच्चों को पीटा भी जाता था। इस तरह उपवास धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों पर दबाव डालकर उन्हें अपनी मर्जी के खिलाफ ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया।

चर्च बंद हुआ तो जंगल में बस गए अनुयायी
साल 2019 में मैकेंजी को हिरासत में लिया गया था। उस पर राष्ट्रीय पहचान संख्या जारी करने की सरकारी व्यवस्था का विरोध करने का मामला सामने आया था। वह इन पहचान संख्याओं को शैतानी बताता था। इसके बाद उसने चर्च बंद कर दिया। बचे हुए लोगों के मुताबिक, वह अनुयायियों को शाकाहोला जंगल के पास एक बड़े रेंच पर ले गया। वहां लोगों ने मिट्टी की झोपड़ियां बनाईं और बाइबिल से जुड़े नामों वाले गांवों में रहने लगे। कोविड-19 महामारी के दौरान दुनिया के अंत को लेकर उसकी बातें और तेज हो गईं। आरोप है कि मैकेंजी और उसके करीबी लोगों ने अनुयायियों पर लंबे समय तक उपवास रखने का दबाव बनाया। यहां तक कि माता-पिता को बच्चों को खाना खिलाने से भी रोका गया।

शाकाहोला जंगल में कैसे खुला मौतों का राज?
अप्रैल 2023 में लापता लोगों की शिकायतों की जांच के दौरान पुलिस को इस मामले का पता चला। मालिंदी के पास शाकाहोला जंगल में तलाशी के दौरान कई कमजोर लोगों को बचाया गया। वहां बड़ी संख्या में उथली कब्रें भी मिलीं। इसके बाद पुलिस और जांच टीमों ने शव निकालने का काम शुरू किया। कई हफ्तों तक चली कार्रवाई में 400 से ज्यादा शव बरामद किए गए। यह जगह करीब 800 एकड़ में फैले चकामा रेंच का हिस्सा थी, जहां मैकेंजी के अनुयायी रहते थे। पोस्टमार्टम रिपोर्टों के अनुसार, ज्यादातर लोगों की मौत भूख के कारण हुई थी। कुछ शवों पर दम घुटने, गला घोंटने या सिर पर चोट लगने के संकेत भी मिले। कई शव सड़ चुके थे, इसलिए मौत की सही वजह पता नहीं चल सकी। कुछ लोगों की बचाए जाने के बाद भी मौत हो गई।

अदालत में क्या साबित हुआ?
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मैकेंजी और उसके साथियों पर धार्मिक विश्वास के नाम पर लोगों को मौत की ओर धकेलने का आरोप लगाया। मैकेंजी ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि उसने किसी को भूखा रहने के लिए मजबूर नहीं किया। अन्य आरोपियों ने भी खुद को निर्दोष बताया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि धार्मिक शिक्षाओं का इस्तेमाल लोगों को भूखा रखकर उनकी जान लेने वाली संगठित व्यवस्था चलाने के लिए किया गया। मैकेंजी और उसके सहयोगियों पर हत्या के अलावा गैर-इरादतन हत्या, आतंकवाद और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार से जुड़े अन्य आरोप भी हैं।

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अब आगे क्या होगा?
हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद मैकेंजी और अन्य आरोपियों को सजा सुनाई जानी है। सजा तय करने से पहले आरोपियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। इस मामले में उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। शाकाहोला जंगल की घटना ने केन्या में धार्मिक संगठनों की निगरानी और कमजोर लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह मामला दिखाता है कि किसी व्यक्ति के धार्मिक दावों पर आंख मूंदकर भरोसा करने और लोगों को बाहरी दुनिया से काट देने के कितने भयावह नतीजे हो सकते हैं।

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