यूक्रेन के मुद्दे पर अगर रूस और पश्चिमी देशों के बीच टकराव बढ़ा, तो उससे दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। ये चेतावनी खाद्य विशेषज्ञों ने दी है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि रूस और यूक्रेन गेहूं और मक्के के सबसे बड़े उत्पादक देशों में शामिल हैं। इन दोनों अनाजों की कीमत में पहले से चढ़ान का रुख है।
विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि जनवरी के मध्य से गेहूं के भाव में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। नतीजतन, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका भाव नौ साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। अगर यूक्रेन-रूस सीमा पर तनाव जारी रहा, तो इस पर लगाम लगने की कोई संभावना नहीं होगी। रूस ने यूक्रेन की सीमा पर अपने लगभग एक लाख फौजी तैनात कर रखे हैं। अमेरिका ने कहा है कि रूस शर्तिया तौर पर यूक्रेन पर हमला करने की तैयारी में है। हालांकि रूस ने इसका खंडन किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध हुआ, तो उसका सबसे खराब असर पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका पर पड़ेगा। रूस और यूक्रेन से अनाज का सबसे ज्यादा आयात इसी क्षेत्र के देश करते हैं। मिस्र तो अपनी कुल अनाज खपत का 60 फीसदी हिस्सा रूस से मंगवाता है। बाकी 30 फीसदी वह यूक्रेन से लेता है। युद्ध का बुरा असर चीन पर भी होगा। चीन मक्के का सबसे बड़ा आयातक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस और यूक्रेन में युद्ध होने से वहां से अनाज मंगवाने वाले देश सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। लेकिन परोक्ष असर अन्य देशों पर भी पड़ेगा, क्योंकि आपूर्ति घटने से दुनिया भर में अनाज के दाम बढ़ जाएंगे। अमेरिका जैसे देशों पर इस महंगाई का ज्यादा असर देखने को मिल सकता है, जो पहले से ही मुद्रास्फीति की ऊंची दर से परेशान है।
इन हालात के मद्देनजर टोक्यो स्थित अनाज कंसल्टैंसी कंपनी ग्रीन काउंटी के प्रमुख नाओयुकी ओमोतो ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘यूक्रेन मुद्दे पर बन रही स्थिति अनाज सप्लाई के नजरिए से गहरी चिंता पैदा कर रही है।’