अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (आईएईए) ने पुष्टि की है कि ईरान की नतांज में परमाणु सुविधा में प्रवेश भवन को नुकसान पहुंचा है। इस्राइल की ओर से जारी उपग्रह (सैटेलाइट) तस्वीरों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह बयान आया है।
पिछले दो दिनों की सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिका व इस्राइल की ओर से की गई बमबारी से हुए नुकसान को दिखाया गया था। परमाणु कार्यक्रमों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने ईरान के नतांज परमाणु सुविधा परिसर को नुकसान होने की पुष्टि की है।
आईएईए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ताजा तस्वीरों के आधार पर आईएईए अब के नतांज में भूमिगत ईंधन संवर्धन संयंत्र (एफईपी) के प्रवेश भवन को हुए कुछ हालिया नुकसान की पुष्टि करता है। इसमें आगे कहा गया, किसी भी तरह के विकिरण संबंधी प्रभाव (रेडियोलॉजिकल नतीजा) होने की उम्मीद नहीं है और एफईपी पर कोई अतरिक्त असर नहीं देखा गया है, जिसे पिछले साल जून में हुए युद्ध के दौरान पहले ही काफी नुकसान पहुंचा था।
जून के युद्ध में भी निशाने पर रहा नतांज
जून में इस्राइल और ईरान के बीच 12 दिन तक चले संघर्ष के दौरान नतांज सुविधा प्रमुख लक्ष्यों में से एक थी। इस संघर्ष में आखिरकार अमेरिका भी शामिल हो गया था।
आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने सोमवार को दावा किया था कि अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमलों में ईरान के किसी परमाणु केंद्र को फिलहाल नुकसान पहुंचने के संकेत नहीं मिले हैं। इसके साथ ही उन्होंने दुनिया से अत्यधिक संयम बरतने की अपील भी की थी। आईएईए प्रमुख ने स्पष्ट किया था कि बुशहर परमाणु उर्जा संयंत्र, तेहरान शोध रिएक्टर और अन्य ईंधन केंद्रों पर किसी हमले या क्षति की सूचना नहीं मिली थी।
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ईरानी अधिकारियों से संपर्क की कोशिश जारी: आईएईए प्रमुख
ग्रॉसी ने कहा कि आईएईए लगातार ईरानी अधिकारियों से संपर्क की कोशिश कर रहा है, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिल रहा है। ईरान पर आईएईए के गवर्नर्स बोर्ड के एक विशेष सत्र की शुरुआत करते हुए ग्रॉसी ने कहा, ईरानी परमाणु नियामक प्राधिकरण से संपर्क करने की कोशिशें जारी हैं। लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। हमें उम्मीद है कि संवाद का यह जरूरी माध्य जल्द दोबारा बहाल हो जाएगा।
देशों से अत्यधिक संयम बरतने की अपील की
राफेल ग्रॉसी ने दुनिया को आगाह किया और 'अत्यधिक संयम' बरतने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी परमाणु केंद्र पर हमला होता है, तो रेडियोएक्टिव रिसाव के कारण बड़े शहरों को खाली कराना पड़ेगा, जिससे गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
इनपुट-आईएएनएस