ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने बुधवार को ईरान के मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भेजने का फैसला किया। करीब 20 साल बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब आईएईए बोर्ड ने ईरान को इस तरह सुरक्षा परिषद के सामने भेजा है।
आईएईए के 35 सदस्यीय बोर्ड में से 23 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। चीन, रूस और नाइजर ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि आठ देशों ने मतदान से दूरी बनाई। एक देश ने बकाया भुगतान के कारण मतदान नहीं किया। यह प्रस्ताव अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी की ओर से पेश किया गया था।
आईएईए बोर्ड ने जून 2025 में ही ईरान को परमाणु अप्रसार संबंधी दायित्वों का पालन न करने वाला देश माना था। इसकी मुख्य वजह यूरेनियम के उन निशानों की जांच में ईरान का अपेक्षित सहयोग नहीं करना था, जो अलग-अलग अघोषित स्थानों पर मिले थे।
पश्चिमी देशों के अधिकारियों को आशंका है कि ये निशान इस बात के संकेत हो सकते हैं कि ईरान ने वर्ष 2003 तक गुप्त परमाणु हथियार कार्यक्रम चलाया था। हालांकि, ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है। उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा।
ईरान के मामले में तनाव उस समय और बढ़ गया था जब जून 2025 में इजराइल और अमेरिका ने उसके परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इन हमलों के बाद से ईरान ने प्रभावित परमाणु स्थलों तक आईएईए निरीक्षकों को पहुंच नहीं दी है। आईएईए अब तक यह भी सत्यापित नहीं कर पाया है कि ईरान के पास मौजूद हथियार-स्तर के करीब पहुंच चुके समृद्ध यूरेनियम के भंडार की मौजूदा स्थिति क्या है।
आईएईए का यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव भी बढ़ा हुआ है। हालिया घटनाक्रम में अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट किया, जिसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। छह महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष में दोनों देशों के बीच तनाव लगातार गंभीर होता जा रहा है। ऐसे में ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजने का फैसला परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले से जारी विवाद को और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा सकता है।