भारत का कहना है कि नए बने आई2यू2 समूह (I2U2 Group) के माध्यम से मध्य पूर्व (Middle Eas) की शांति और समृद्धि में उसका महत्वपूर्ण स्थान है। उसे विश्ववास है कि इस क्षेत्र और दक्षिण एशिया (South Asia) की ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा व आर्थिक प्रगति में वह महत्वपूर्ण योगदान देगा। चार देशों वाले इस समूह में भारत, इस्राइल, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अमेरिका शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में फलस्तीन मुद्दे पर खुली बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि आर रविंद्र ने कहा, आई2यू2 (I2U2 Group) की हाल में हुई वर्चुअल बैठक के दौरान भारत, इस्राइल, यूएई और अमेरिका में छह प्रमुख क्षेत्रों जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा में संयुक्त निवेश (Joint Investment) बढ़ाने पर सहमति बनी थी। 14 जुलाई को हुई वर्चुअल बैठक के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में कहा गया था कि इस विशिष्ट समूह का उद्देश्य विश्व के सामने मौजूद चुनौतियों का सामना संयुक्त निवेश और जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में नई पहल के साथ करना है।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने कहा, राष्ट्रपति बाइडन ने वर्चुअल बैठक के दौरान इस्राइल और अन्य देशों के साथ क्षेत्र और बाहर, निकट सहयोग की संभावना जताई थी। रविंद्र ने इस दौरान इस्राइल और फलस्तीन के बीच हालिया घटनाक्रम, विशेषकर हिंसक हमलों, नागरिकों की हत्याओं, विध्वंसक और उकसावे की कार्रवाई पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, भारत हमेशा ऐसी घटनाओं का विरोध करता है और इन्हें पूरी तरह रोकने का हिमायती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस्राइल और फलस्तीन के बीच राजनीतिक सहमति के बिना क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थायित्व संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को राजनीतिक प्रयास बढ़ाने चाहिए। उन्होंने राजनीतिक प्रक्रिया के माध्यम से इस मसले का जल्द समाधान निकालने की वकालत की।
दो अलग देश बनाने की वकालत
इस्राइल और फलस्तीन के बीच भारत लगातार सीधी शांति वार्ता का हिमायती रहा है। रविंद्र ने कहा, हमारा मानना है कि दो देश बनाने का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए यही सबसे सही रास्ता है। यह वार्ता अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति वाले ढांचे के मुताबिक हो। इसमें फलस्तीन के लोगों की अलग देश पाने और इस्राइल की सुरक्षा चिंताओं का ध्यान रखा जाए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सुरक्षा परिषद को इस्राइल और फलस्तीन के बीच शांति प्रक्रिया बाधित करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ सख्त संकेत भेजना चाहिए।
सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों से निपटने पर जोर
भारत ने इस मामले के पक्षों से सुरक्षा और आर्थिक चिंताओं का तत्काल समाधान निकालने की जरूरत पर जोर दिया। इसमें फलस्तीनी प्राधिकरण के वित्तीय हालात और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा प्रमुख हैं। उन्होंने कहा, हमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के फलस्तीन के लोगों में विश्वास बढ़ाने और फलस्तीन के आर्थिक हालात सुधारने के लिए उठाए गए इस्राइल के कदमों की जानकारी है। ऐसी पहल दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है और स्थायित्व बनाए रखते हुए आतंक व हिंसा की संभावना खत्म करती हैं।