भारत में जर्मनी के पूर्व राजदूत थॉमस माटुसेक ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि जब मैंने पहलगाम का नाम सुना तो मैं टूट गया था। मैंने भारत को लंबे समय तक आतंकवाद से लड़ते देखा है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के जर्मनी आगमन पर खुशी जताई। वहीं जर्मनी के एक और पूर्व राजदूत बर्न्ड मुत्जेलबर्ग ने कहा कि आतंक से लड़ाई में सबके साथ की जरूरत है।
पहलगाम आतंकी हमले ने आघात पहुंचाया
जर्मनी के पूर्व राजदूत थॉमस माटुसेक ने कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले ने मुझे बहुत गहरा आघात पहुंचाया। अब यह कोई रहस्य नहीं है कि आतंकवादियों के पीछे कौन खड़ा है। भारत का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल उस वक्त आया है, जब यहां नई जर्मन सरकार है और निरंतरता बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। प्रतिनिधिमंडल का बहुत स्वागत है। हमें खुशी है कि वे यहां हैं। जब मैंने पहलगाम का नाम देखा, तो मुझे बहुत धक्का लगा।
उन्होंने कहा कि हमने भारत और पाकिस्तान के बीच हथियारों, आतंकवाद और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों का एक लंबा दौर देखा है, लेकिन चूंकि दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं, इसलिए यह एक नए स्तर पर पहुंच गया है। मैं केवल भारत सरकार को उनकी प्रतिक्रिया में संयमित होने की सिफारिश कर सकता हूं। हम अच्छी तरह से जानते हैं कि आतंकवादी कौन हैं। हम जानते हैं कि आतंकवादियों के पीछे कौन है। मैंने प्रार्थना की कि भारत का जवाब भयानक नहीं होगा।
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भारत बने जर्मनी का अग्रणी साझेदार
पूर्व राजदूत थॉमस माटुसेक ने अपनी सरकार को सलाह दी कि भारत को रणनीतिक साझेदार के रूप में अग्रणी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जर्मनी स्थिरता में रुचि रखता है। इसका मतलब है कि दोनों पक्षों के बीच गोलीबारी के बजाय बातचीत के माध्यम से मुद्दों को हल करना। इस दुनिया में जहां पुराने गठबंधनों में दरारें दिखाई देती हैं। वहीं हमें संभावित भागीदारों की तलाश करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और मुझे अपनी सरकार को सलाह देनी हो तो भविष्य के लिए हमारे रणनीतिक साझेदार कौन होने चाहिए? निश्चित रूप से भारत को सबसे आगे होना चाहिए। उन्होंने भारत के साथ जर्मनी के रणनीतिक सहयोग को और अधिक गहरा करने का भी आह्वान किया।
पूर्व राजदूत ने कहा कि अगर हम चीन या अमेरिका को देखें जो हमारे सबसे करीबी साझेदार हैं और अस्थिरता और अराजकता के दौर से गुजर रहे हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि हम भारत के साथ अपने मतभेदों को सुधारें और व्यापार पर एक समझौते पर पहुंचें। भारत के साथ अपने रणनीतिक सहयोग को गहरा करें। लंबे समय में भारत लोकतंत्र के उन्हीं दुश्मनों से लड़ रहा है।
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आतंकवाद जघन्य अपराध और इसकी निंदा की जाए
भारत में जर्मनी के पूर्व राजदूत बर्न्ड मुत्जेलबर्ग ने कहा कि आतंकवाद एक जघन्य अपराध है। इसकी सभी को निंदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिक आबादी के खिलाफ आतंकवाद करने का कोई बहाना नहीं हो सकता। मुत्जेलबर्ग ने कहा कि हम इस लड़ाई में एक साथ खड़े हैं। हमने 30 साल पहले एक रणनीतिक साझेदारी स्थापित की थी। यह साझेदारी अब और अधिक सारगर्भित और सार्थक हो गई है। हमारे सामने सबसे गंभीर सुरक्षा चुनौतियों में से एक आतंकवाद की चुनौती है। हमें वास्तव में इस बड़ी चुनौती के खिलाफ एक साथ खड़ा होना होगा और जहां भी संभव हो, इससे लड़ना होगा।
पूर्व राजदूत ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जर्मनी पहुंचा था। यह दोनों देशों के बीच बढ़ती मित्रता का प्रतीक है। यह पूरी तरह से लोकतांत्रिक प्रतिनिधिमंडल है। हमें उनकी बातें सुनकर और उनके साथ अपने विचार साझा करके खुशी हो रही है।