अमेरिका, रूस और चीन की सेनाओं के पास हाइपरसोनिक वॉरहेड के प्रोटो-टाइप होने के दावों पर सवाल खड़ा हो गया है। एक शोध में खुलासा हुआ है कि ध्वनि की गति से दुश्मन पर हमला बोलने वाले यह आधुनिक हथियार परीक्षण में विफल रहे हैं।
खुलासा : ध्वनि की गति से दुश्मन पर हमला बोलने वाले सुपरवेपन या आधुनिक हथियार परीक्षण में विफल
वैज्ञानिकों ने ऐसे अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल को कोरी कल्पना करार दिया है। अमेरिकी सेनाओं ने इस शोध को बेकार बताकर खारिज कर दिया है। मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के शोधकर्ता का शोध हाल ही में साइंस एंड ग्लोबल सिक्योरिटी प्रकाशित हुआ है।
फिजिसिस्ट और शोध के लेकर डॉक्टर डेविड राइट का कहना है कि सुपरवेपन सिर्फ मृगतृष्णा है। वहीं अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने शोध को पुराने आंकड़ों पर आधारित बताया है। वहीं अमेरिकी सरकार के लंबे समय तक सलाहकार रहे फिजिसिस्ट एल गार्विन इन्हें इस शोध पत्र को गंभीर बताया है।
क्या होते हैं हाइपरसोनिक वॉरहेड
हाइपरसोनिक वॉरहेड युद्ध में सबसे ताकतवर होता है। इसमें परमाणु या दूसरे हथियारों से 1 सेकंड में 8.4 किलोमीटर दूर तक हमला संभव है। हाइपरसोनिक व्हीकल्स आवाज की गति से 5 गुना अधिक तेजी से या जेटलाइनर की गति से कई गुना तेजी से चलते हैं।
बैलेस्टिक मिसाइलों से भी धीमी है रफ्तार
कंप्यूटर सिम्यूलेशन में वैज्ञानिकों ने देखा कि हाइपरसोनिक व्हीकल्स की गति बैलेस्टिक मिसाइल से भी धीमी रही दूर से आने वाले हथियारों को रोकने में भी उसे परेशानी का सामना करना पड़ा। डॉक्टर राइट और डॉक्टर ट्रेसी का कहना है कि इन नए हथियारों से उम्मीद बढ़ सकती है पर यह क्रांतिकारी नहीं है।
प्रयोग जारी रखने को गलत आंकड़े दे रही सेना
वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन में वर्ष 2019 में सीनेट में दिए गए वायुसेना के जनरल जॉन ई हाइटन के जवाब का भी जिक्र किया है। सामान्य मिसाइल की तुलना में इससे आधा या इससे भी कम समय लगता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह बयान सिर्फ इसलिए था कि ऐसे हथियारों पर काम को आगे बढ़ाया जा सके और खर्च रकम को सही साबित कर सकें।
छह हाइपरसोनिक हथियारों पर काम
अमेरिकी सेना अभी 6 हाइपरसोनिक हथियारों पर काम कर रही है जिसकी बहुत कम ही जानकारियां लोगों के बीच में हैं। डॉक्टर राइट का कहना है कि भौतिक विज्ञान की दुनिया में इस तरह के हथियारों के लिए कई तरह की चुनौतियां हैं जो इनके अस्तित्व में आने पर संदेह पैदा करती हैं।