बेरुत के गर्वनर मारवन अबोद ने धमाके को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में हुए परमाणु हमले जैसा करार दिया। उन्होंने रोते हुए कहा, जैसा हिरोशिमा और नागासाकी में हुआ था, मुझे वैसा ही महसूस हुआ। जिंदगी में इतनी तबाही कभी नहीं देखी। मैं अपने बेटे को लेकर टेबल के नीचे छिपा रहा।
कतर और इराक ने भेजी मेडिकल टीमें
तमाम सुविधाओं से लैस कतर और इराक की मेडिकल टीमें बेरुत पहुंच गईं। कतर ने एक हजार बेड वाले दो फील्ड अस्पतालों को भेजा। इसी तरह का एक अस्पताल इराक ने भेजा है। कुवैत ने भी मेडिकल सहायता भेजने की बात कही है। ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने मारे गए लोगों के प्रति दुख प्रकट करते हुए मेडिकल टीम भेजने का प्रस्ताव दिया है। जर्मनी भी मदद को आगे आया है। साइप्रस ने कहा, हमने धमाके में घायल लोगों का अपने यहां इलाज कराने और मेडिकल टीमें लेबनान भेजने का प्रस्ताव दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने धमाके को बताया ‘अटैक’
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, बेरुत धमाका ‘अटैक’ जैसा लगता है। जब पत्रकारों ने पूछा कि उन्होंने इसे एक दुर्घटना के बदले हमला क्यों कहा, जबकि लेबनान अभी कोई नतीजे पर नहीं पहुंचा है? इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, मैं अपने कुछ वरिष्ठ जनरलों से मिला हूं और उन्होंने महसूस किया है कि यह एक घटना नहीं थी, जिस तरह का विस्फोट हुआ। उन्हें लगता है कि यह एक ‘हमला’ था। बम से किया गया एक हमला।
विस्फोट पर अटकलें जल्दबाजी: ब्रिटेन
लंदन। ब्रिटेन ने कहा कि विस्फोट के कारणों पर अटकलबाजी लगाना अभी जल्दबाजी होगा। ब्रिटेन के शिक्षा मंत्री निक गिब ने कहा कि निश्चित रूप से लेबनान के अधिकारी मामले की जांच कर रहे होंगे, लेकिन धमाके के कारणों पर अटकलें लगाना जल्दबाजी होगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और इस्राइल के प्रधानमंत्री रुवेन रिवलिन ने भी मदद का प्रस्ताव दिया है।
रूस भेजेगा बचाव दल, अस्थायी अस्पताल
रूस ने मदद का हाथ बढ़ाते हुए मेडिकल टीम, बचाव दल, अस्थायी अस्पताल और कोरोना वायरस की जांच के लिए लैब भेजने का फैसला किया। आपात मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी बयान में इसकी जानकारी दी गई।