पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों के उत्पीड़न के मामले अकसर सामने आते रहते हैं। इस बीच एक रिपोर्ट आई है जो देश के पंजाब प्रांत में अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय के उत्पीड़न में 'खतरनाक' बढ़ोतरी की दास्तां बयां करती है। दरअसल, पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने बुधवार को एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें दावा किया गया है कि पंजाब प्रांत में अमहमदिया मुसलमानों के उत्पीड़न में बढ़ोतरी हुई है।
इन जिलों का प्रशासन अहमदिया पूजा स्थलों के खिलाफ हिंसा में शामिल
इतना ही नहीं, इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस बात के सबूत भी मिले हैं कि पंजाब के गुजरांवाला और वजीराबाद जिलों का नागरिक प्रशासन बीते कुछ महीनों में अहमदिया पूजा स्थलों पर मीनारों को नष्ट करने में सीधे तौर पर शामिल था। जब एक स्थानीय द्वारा समुदाय के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अहमदिया पूजा स्थलों पर मीनारों को नष्ट करने की अपनी कार्रवाई को लेकर प्रशासन ने दावा किया है उन्होंने ऐसा भीड़ की हिंसा के खतरे को कम करने के लिए किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस तरह से अधिकारियों ने इस मामले को संभाला था उससे अहमदिया समुदाय के प्रति हिंसा और दुश्मनी को बढ़ावा मिला है।
एचआरसीपी ने जताई इन मुद्दों पर चिंता
अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने अल्पसंख्यक समुदाय के सामने आने वाले विभिन्न मुद्दों पर चिंता जाहिर की है। इन मुद्दों में अहमदी कब्रों को अपवित्र करना, उनके पूजा स्थलों पर मीनारों को नष्ट करना और सदस्यों के खिलाफ ईद पर अनुष्ठान पशु बलि देने के लिए दर्ज की गई एफआईआर शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि असल चिंता की बात यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों के बीच ऐसी धारणा बन गई है कि कुछ कानूनी और संवैधानिक प्रावधान इस तरह के उत्पीड़न के लिए जगह प्रदान करते हैं, जबकि संविधान के अनुच्छेद 20 (बी) के तहत ऐसा नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के 2014 और 2021 फैसलों को लागू करने की सिफारिश
एचआरसीपी ने अपनी रिपोर्ट में अहमदिया समुदाय के प्रति हिंसा की ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पुलिस की क्षमता विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही अपनी रिपोर्ट में एचआरसीपी के सर्वे मिशन ने 2014 और 2021 के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को लागू करने की सिफारिश भी की है, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए एक विशेष पुलिस बल की स्थापना करना शामिल है।
लगातार होते रहते हैं अहमदिया समुदाय के खिलाफ हमले
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के खिलाफ उत्पीड़न के मामले लगातार होते रहते हैं। बीते महीने ही अहमदिया समुदाय की एक बुजुर्ग महिला को पंजाब के सियालकोट जिले में एक स्थानीय मौलवी और उनके अनुयायियों द्वारा कब्रिस्तान में दफनाने से इनकार कर दिया गया था। पाकिस्तान में इस तरह के हमलों की लंबी फेहरिस्त है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में पिछले तीन महीनों में पांच अहमदी मस्जिदों पर हमला किया गया है। अगस्त 2022 में लाहौर से लगभग 150 किमी दूर फैसलाबाद में समुदाय से जुड़ी सोलह कब्रों को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा तोड़ दिया गया था। 2017 के बाद से अलग-अलग कट्टरपंथी हमलों में 40 से अधिक अहमदी मारे गए हैं।
पाकिस्तान में अहमदियों के खिलाफ अक्सर ईशनिंदा के मामले दर्ज किए जाते हैं, जिसकी सजा मृत्युदंड तक है। पिछले कुछ समय में कई अहमदियों पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया और उनकी हत्या तक कर दी गई। मई 2022 में एक ऐसी ही घटना में 33 वर्षीय अबुल सलाम की हत्या कर दी गई थी।
पाकिस्तान में समुदाय की स्थिति क्या है?
दुनिया में सबसे ज्यादा अहमदियों की संख्या पाकिस्तान में रहती है। समुदाय की आबादी देश की कुल आबादी का करीब 2.2 फीसदी है। इनकी संख्या 40 लाख के आसपास बताई जाती है। पंजाब प्रांत में रबवाह शहर अहमदिया समुदाय का वैश्विक मुख्यालय हुआ करता था लेकिन बाद में यह इंग्लैंड चला गया।
पाकिस्तान में कानून ही करता है भेदभाव
1974 में संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद से, अहमदिया पाकिस्तान में आधिकारिक रूप से मुस्लिम नहीं हैं। अहमदी समुदाय यहां दूसरे दर्जे के नागरिकों के रूप में रहता है। प्यू रिसर्च पोल के अनुसार, केवल सात फीसदी पाकिस्तानी ही अहमदियों को मुसलमानों के रूप में स्वीकार करते हैं। इसके अलावा यहां उनके धर्म के प्रचार के अधिकार को कानूनी रूप से ही नकारा गया है। अल अरबिया पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 298-सी अहमदिया के खिलाफ भेदभाव को कानूनी दर्जा देती है। यह धारा अहमदियों को खुद को मुस्लिम कहने या अपने धर्म का प्रचार करने से रोकती है। यही कारण है कि अहमदी समुदाय अपनी सुरक्षा के लिए पाकिस्तानी कानून-व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग करता आया है।