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Israel Hamas War: बड़े हमले से पहले छोटी-छोटी घुसपैठ, हमास को मिटाने के लिए ऐसे गुरिल्ला युद्ध कर रहा इस्राइल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sat, 28 Oct 2023 05:52 PM IST

सार

Guerilla Warfare Against Hamas: हमास ने इस्राइल के खिलाफ शहरी इलाकों में मानव ढाल का उपयोग करना शुरू कर दिया है। लिहाजा हमास को मिटाने के लिए इस्राइल गुरिल्ला युद्ध कर रहा है। 
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हमास के खिलाफ इस्राइल की गुरिल्ला लड़ाई - फोटो : अमर उजाला
इस्राइल और हमास के बीच जारी लड़ाई को अब तीन हफ्ते बीत चुके हैं। इस बीच गाजा पट्टी में छिपे हमास के लड़ाकों को मारने के लिए इस्राइल की सेना ने जमीनी अभियान शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई शुरू करने से पहले इस्राइल ने गुरिल्ला तकनीक का इस्तेमाल किया। इस रणनीति का उपयोग दशकों से होता रहा है। अब हमास के खिलाफ लड़ाई गुरिल्ला तकनीक फिर से चर्चा में आ गई है। 

आइये जानते हैं कि आखिर क्यों सुर्खियों में है गुरिल्ला युद्ध? आखिर इस्राइल ने हमास के खिलाफ कैसे गुरिल्ला तकनीक को अपनाया? क्यों शुरू किया गया यह युद्ध? 


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हमास के खिलाफ इस्राइल की गुरिल्ला लड़ाई - फोटो : अमर उजाला
इस्राइल और हमास के बीच जारी लड़ाई को अब तीन हफ्ते बीत चुके हैं। इस बीच गाजा पट्टी में छिपे हमास के लड़ाकों को मारने के लिए इस्राइल की सेना ने जमीनी अभियान शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई शुरू करने से पहले इस्राइल ने गुरिल्ला तकनीक का इस्तेमाल किया। इस रणनीति का उपयोग दशकों से होता रहा है। अब हमास के खिलाफ लड़ाई गुरिल्ला तकनीक फिर से चर्चा में आ गई है। 

आइये जानते हैं कि आखिर क्यों सुर्खियों में है गुरिल्ला युद्ध? आखिर इस्राइल ने हमास के खिलाफ कैसे गुरिल्ला तकनीक को अपनाया? क्यों शुरू किया गया यह युद्ध? 

हमास के खिलाफ इस्राइल की गुरिल्ला लड़ाई - फोटो : अमर उजाला
आखिर क्यों सुर्खियों में है गुरिल्ला युद्ध? 
7 अक्तूबर को हमास ने हमला कर इस्राइल को गहरा घात दिया। तब से इस्राइल ने गाजा पट्टी में मौजूद  हमास के ठिकानों को नस्तनाबूत करने के लिए कई हवाई हमले किए। इसके साथ ही इस्राइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने गाजा में जमीनी हमले की योजना बनाई। शुरुआत में आईडीएफ अपने प्रयास में सफल नहीं हुई और उसे जमीनी अभियान की कार्रवाई टालनी पड़ी। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में आईडीएफ ने हर बार पीछे हटने से पहले गाजा में तीन लक्षित और छोटी घुसपैठ शुरू की। इस्राइल की प्रख्यात नौसेना इकाई शायेटेट के 13 नौसैनिक कमांडो ने जमीन के रास्ते दो घुसपैठें कीं। वहीं एक बार समुद्र के रास्ते घुसपैठ की गई।

इस्राइली मीडिया रिपोर्ट की मानें, तो प्रत्येक घुसपैठ के जरिए सीमित संख्या में हमास के बुनियादी ढांचों को नष्ट किया गया। इसके जरिए इस्राइली सेना ने हवाई हमलों ने कहीं अधिक क्षति पहुंचाई है, इसलिए प्रभाव काफी सीमित था।

शुरुआत में उम्मीदें गाजा में अब तक के सबसे बड़े जमीनी हमले की लगाई गई थीं जिसके लिए 3,60,000 रिजर्व सैनिक बुलाए गए थे। हालांकि, इस्राइली सेना द्वारा जो कुछ किया गया है वह अभी भी 2014 में गाजा में किए गए जमीनी आक्रमण के स्तर तक नहीं पहुंचा है।

जब इस्राइल बार-बार जमीनी हमले में देरी कर रहा था तो सबके मन में कई सवाल थे। सवाल थे कि क्या अब तक आक्रमण में देरी करना सही कदम था। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रक्रिया दो सप्ताह पहले ही शुरू हो गई थी, लेकिन एक या दो दिन बाद ही पता चला कि उस समय गाजा में घुसपैठ की सूचना दी गई थी। योजना थी कि लड़ाई में वास्तव में हमास को शामिल नहीं किया जाए। घटनाक्रमों की शृंखला से स्पष्ट होता है आईडीएफ हमास पर गुरिल्ला युद्ध रणनीति अपना रहा है।

हमास का सुरंग नेटवर्क - फोटो : AMAR UJALA
हमास के खिलाफ क्यों शुरू किया गया गुरिल्ला युद्ध?
इस समय गाजा शहर में खुद को बचाए रखने के लिए हमास जिन तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है वो घात लगाकर किए जाने वाले हमले, सुरक्षित दिखने वाली चीजों पर विस्फोट करना और हिट-एंड-रन शामिल है। इन तरीकों के जरिए हमास इस्राइल के हवाई और अन्य तकनीकी लाभों को बेअसर करना चाहता है।  

वहीं, गुरिल्ला युद्ध की बात करें तो यह लगभग युद्ध जितना ही पुराना है। परंपरागत रूप से इसका इस्तेमाल छोटे या कमजोर पक्ष द्वारा बड़े या कम सक्रिय पक्ष को रोकने के लिए किया जाता था। चूंकि हमास ने इस्राइल के खिलाफ शहरी इलाकों में मानव ढाल का उपयोग करना शुरू कर दिया है। लिहाजा इस्राइल को भी समझ आया है कि बड़ी और अधिक शक्तिशाली सेना होने का मतलब तकनीक में आश्चर्य के तत्व को छोड़ना नहीं है। सीधे शब्दों में कहें तो, गाजा में मौजूद हमास के लड़ाकों को नहीं पता कि आईडीएफ आगे कहां से छलांग लगा सकती है।

हमास का सुरंग नेटवर्क - फोटो : AMAR UJALA
गुरिल्ला तकनीक के इस्तेमाल का उद्देश्य क्या है?
इस्राइली मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इसे हमास को इस हद तक परेशान करने के लिए तैयार किया गया है कि यह मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव डाले, ताकि वह अपनी रक्षात्मक मुद्रा का दोबारा अनुमान लगाना शुरू कर दे। उधर आईडीएफ के पास ऐसे ड्रोन और अन्य निगरानी प्लेटफार्म हैं जिनके जरिए वह हमास की गतिविधियों का निरीक्षण कर सकता है। 

हमास का सुरंग नेटवर्क - फोटो : SOCIAL MEDIA
आगे कैसे इस्तेमाल की जाएगी गुरिल्ला तकनीक?
गुरिल्ला युद्ध रणनीति की तरह ही आईडीएफ 'हिट एंड रन' का इस्तेमाल करती आई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आईडीएफ रणनीति को ठीक से लागू करता है, तो यह एक ही समय में कई छोटी घुसपैठ करना शुरू कर देगा। इससे हमास और अधिक भ्रमित हो जाएगा कि आगे क्या होगा, कब कोई घुसपैठ बड़ी हो सकती है, कहां से हो सकती है और फिर उस समय हमला होगा जब हमास की सुरक्षा अचानक कम हो जाएगी।

इससे आईडीएफ को बड़े सैनिकों के साथ गाजा में प्रारंभिक पैर जमाने में मदद मिलेगी, इससे पहले कि हमास जवाबी हमला कर सके।

Israel Defence Forces - फोटो : Social Media
गुरिल्ला युद्ध के नुकसान भी हो सकते हैं?
गुरिल्ला युद्ध तकनीक के इस्तेमाल का मतलब यह नहीं है कि इस्राइली सेना खतरों से बच सकती है। कई बार सैनिकों को अपने बख्तरबंद वाहनों से बाहर निकलने और घर-घर, सड़क के कोने-कोने में जाने की जरूरत होगी, ताकि सुरंगों और अन्य खुफिया जगहों पर छिपे आतंकियों को जड़ से उखाड़ फेंका जा सके। आशंका होती है कि जब आईडीएफ कर्मी किसी घर या सुरंग का दरवाजा खोलेंगे, उस दौरान सैनिकों के हताहत होने का खतरा होगा। क्योंकि दीवारों में छिपे हुए छोटे छेद के जरिए हमास के लड़ाके गोली मार सकते हैं। संक्षेप में कहें तो तकनीक के इस्तेमाल करने के तरीके पर ही नफा और नुकसान शामिल है। 
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